पीलीभीत , फरवरी 13 -- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में सरकारी खजाने में बड़ी सेंधमारी का मामला सामने आया है। बीसलपुर क्षेत्र के एक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय में नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) इल्हाम शम्सी ने फर्जी बिलों के जरिए ट्रेजरी से 98 बार में करीब 1.01 करोड़ रुपये अपनी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर करा दिए। बैंक की सतर्कता से इस घोटाले का खुलासा हुआ, जिसके बाद 65.53 लाख रुपये की धनराशि फ्रीज कर दी गई है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इल्हाम शम्सी की नियुक्ति एक सहायता प्राप्त कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में हुई थी, लेकिन वह बीते आठ वर्षों से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में लिपिकीय कार्य कर रहा था। इसी दौरान उसे वेतन बिलों और ट्रेजरी प्रक्रिया की जानकारी हो गई, जिसका फायदा उठाकर उसने योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धन की हेराफेरी की।

गत वर्ष 3 दिसंबर को बैंक ऑफ बड़ौदा प्रबंधन को आरोपी की पत्नी अर्शी खातून के बचत खाते में लगातार बड़ी धनराशि आने पर संदेह हुआ। जांच के बाद बैंक ने खाते में जमा 65.53 लाख रुपये फ्रीज कर दिए, जबकि इससे पहले आरोपी 36.41 लाख रुपये यूपीआई के माध्यम से निकाल चुका था।

बैंक अभिलेखों के अनुसार जून 2024 में अर्शी खातून का बचत खाता खुलवाया गया। 12 जून 2024 को ट्रेजरी से भुगतान की स्वीकृति ली गई और 12 सितंबर 2024 को पहली बार एक लाख रुपये खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद हर माह दो से छह बार ट्रेजरी से रकम आती रही। 17 दिसंबर 2025 तक खाते में कुल 98 बार में 1.01 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए।

बैंक की रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेकर जांच मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति को सौंपी। सीडीओ ने 5 फरवरी को जिला विद्यालय निरीक्षक को नोटिस जारी कर संबंधित अभिलेख तलब किए। प्रारंभिक जांच में कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है।

नियमानुसार जिला विद्यालय निरीक्षक के हस्ताक्षर से वेतन और अन्य मदों के बिल ट्रेजरी भेजे जाते हैं। आरोप है कि इल्हाम शम्सी ने फर्जी बिल तैयार कर हस्ताक्षर कराए और उसी आधार पर धनराशि पत्नी के खाते में ट्रांसफर करा दी। जांच में यह भी आशंका जताई गई है कि इस पूरे प्रकरण में कार्यालय के अन्य कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है।

जांच के दौरान यह सवाल भी उठा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को वर्षों तक लिपिकीय कार्य क्यों करने दिया गया। इस पर जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि वह चार महीने पहले ही स्थानांतरित होकर आए हैं और पूर्व से कार्यरत कर्मचारी पुराने दायित्व निभाते चले आ रहे थे।

फिलहाल आरोपी इल्हाम शम्सी जांच शुरू होने के बाद से कार्यालय नहीं आ रहा है। सीडीओ की ओर से मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की तैयारी है।

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