धार , जनवरी 02 -- मध्यप्रदेश में धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में शुक्रवार को 'पीथमपुर बचाओ समिति' के सदस्यों ने मौन विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन आयशर चौराहे पर आयोजित किया गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने भोपाल गैस त्रासदी के रासायनिक कचरे से निकली 899 टन राख को शहर से हटाने की मांग उठाई। इस दौरान कई सदस्य मुंह पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराते नजर आए।
समिति के सदस्यों ने बताया कि एक वर्ष पूर्व भोपाल गैस त्रासदी से संबंधित 337 टन रासायनिक कचरा निष्पादन के लिए पीथमपुर लाया गया था। इस कचरे को पीथमपुर स्थित रामकी एनवायरो नामक कंपनी में तीन ट्रायल के बाद जलाया गया, लेकिन इसके निष्पादन के बाद बची 899 टन राख अब भी उसी परिसर में रखी हुई है।
पीथमपुर बचाओ समिति के अध्यक्ष हेमंत हीरोले ने कहा कि यह राख शहर के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। उन्होंने बताया कि माननीय न्यायालय ने मध्यप्रदेश सरकार को इस राख को किसी अन्य स्थान पर दफनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक उन निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। हीरोले के अनुसार इस राख में अब भी कई जहरीले रासायनिक तत्व मौजूद हैं, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
समिति ने सरकार से मांग की है कि इस राख को शीघ्र पीथमपुर से बाहर अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय को लेकर समिति जल्द ही माननीय उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेगी।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 1 जनवरी को जब यह रासायनिक कचरा पीथमपुर लाया गया था, तब भी शहर में व्यापक विरोध देखने को मिला था। उस समय आमरण अनशन किया गया था और 3 जनवरी को पीथमपुर बंद का आह्वान हुआ था, जिसके चलते कई स्थानों पर चक्काजाम की स्थिति बनी थी। आंदोलन के दौरान दो युवकों द्वारा पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किए जाने की घटना भी सामने आई थी। उस समय पीथमपुर बंद को रहवासियों का व्यापक समर्थन मिला था।
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