श्रीनगर , अक्टूबर 31 -- जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से विस्थापित लोगों को भूमि और घरों पर पूर्ण कानूनी मालिकाना हक देने के लिए कई ठोस कदम उठाये गये हैं।
डॉ नरेंद्र सिंह रैना के एक प्रश्न के उत्तर में सरकार की ओर से सदन को बताया गया कि 1947, 1965 और 1971 के प्रभावित शरणार्थियों को जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों में बसाया गया है और उन्हें धीरे-धीरे कानूनी अधिकार देने की प्रक्रिया चल रही है।
यह भी बताया गया कैबिनेट आदेश संख्या 578 के तहत 1947 के शरणार्थियों को राजकीय और परित्यक्त भूमि आवंटित की गयी थी और भूमि की कमी के लिए मुआवज़ा भी दिया गया था। यह मुआवज़ा शुरू में 5,000 रुपये प्रति कनाल तय किया गया था, जिसे 2008 में बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति कनाल कर दिया गया था।
सरकार ने बताया कि कृषि सुधार अधिनियम 1976 की धारा 3ए के तहत परित्यक्त भूमि पर कब्जे का अधिकार प्रवासियों को दिया गया है, जबकि सरकारी आदेश संख्या 254 में राज्य की भूमि पर स्वामित्व अधिकार भी प्रदान किया गया।
इसके अलावा, सरकार ने 2024 में तीन महत्वपूर्ण आदेश जारी किये, जिनके तहत 1947, 1965 और 1971 के शरणार्थियों के साथ-साथ पश्चिमी पाकिस्तान से आये शरणार्थियों को उन जमीनों का कानूनी स्वामित्व दिया गया, जिन पर वे दशकों से कब्जा किये हुए थे।
बयान में कहा गया है कि तहसीलदारों को निर्देश दिये गये हैं कि वे पात्र व्यक्तियों की फाइलें प्राथमिकता के आधार पर तैयार करें तथा जागरूकता शिविरों के माध्यम से इस प्रक्रिया में तेजी लायी जाये, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इन लाभों से वंचित न रहे।
सरकार के अनुसार, ये कदम दशकों से जम्मू-कश्मीर में रह रहे शरणार्थियों को न्याय और संपत्ति का अधिकार प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
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