बैतूल , नवम्बर 13 -- मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में बैतूल जिले से बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। नगर पालिका क्षेत्र के एक लाभार्थी के नाम पर तीन बार लोन स्वीकृत किया गया और कागजों में उसे चुकता भी दिखाया गया, जबकि उसे एक भी रुपया नहीं मिला।

पेशे से मोटर मैकेनिक सतीश मिश्रेकर ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना के तहत आवेदन किया था। जुलाई 2020 में पंजाब नेशनल बैंक से 10 हजार रुपये का पहला लोन स्वीकृत हुआ और नवंबर 2020 तक उसे कागजों में चुकता भी दिखा दिया गया। इसके बाद अगस्त 2023 में 20 हजार रुपये का दूसरा और नवंबर 2025 में 50 हजार रुपये का तीसरा लोन स्वीकृत बताया गया। सतीश के अनुसार, इन तीनों में से किसी भी राशि का भुगतान उन्हें नहीं मिला। बैंक अधिकारियों से पूछने पर वे यह नहीं बता पाए कि बिना भुगतान के लोन जारी और चुकता कैसे दर्ज हो गया।

जांच में पता चला कि पीएम स्वनिधि पोर्टल पर लोन स्वीकृत और भुगतान दिखाया गया है, लेकिन बैंक के सीबीएस (कोर बैंकिंग सिस्टम) में किसी भी राशि का कोई रिकॉर्ड नहीं है। जिला शहरी परियोजना प्रबंधक हंसराज मस्तकर ने बताया कि सतीश जैसे एक-दो और मामले सामने आए हैं। कुछ बैंकों ने पोर्टल पर लोन स्वीकृत दिखाकर न तो राशि जारी की और न ही वास्तविक भुगतान किया। इससे हितग्राही और सरकार दोनों गुमराह हुए हैं।

प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वर्ष 2020 में लॉकडाउन के दौरान शुरू की गई थी, ताकि छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी के ऋण मिल सके। बैतूल जिले में अब तक 23,738 हितग्राहियों को लोन स्वीकृत बताए गए हैं। पहले चरण में 10 हजार रुपये 16 हजार वेंडर्स को, दूसरे चरण में 20 हजार का लोन 5,799 वेंडर्स को और तीसरे चरण में 50 हजार का लोन 1,600 वेंडर्स को स्वीकृत बताया गया है।

सतीश मिश्रेकर जैसे मामलों ने इन आंकड़ों की सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि गरीबों की मदद के नाम पर चल रही इस योजना में आखिर पैसा किसके पास गया।

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