जयपुर , नवंबर 13 -- प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) का मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन को बढ़ावा देना एवं कामगारों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के राजस्थान अंचल के प्रभारी एवं अपर केंद्रीय आयुक्त अजीत कुमार ने गुरुवार को यहां प्रेस वार्ता में हाल में शुरू की गयी पीएमवीबीआरवाई, कर्मचारी नामांकन अभियान-2025 एवं ईपीएफओ के हालिया पहलों, सुधारो एवं नवाचारों के बारे मे बताया।|श्री कुमार ने बताया कि गत एक अगस्त से शुरू की गयी यह योजना 31 जुलाई 2027 (दो वर्ष) तक जारी रहेगी, जिसके तहत लाख रुपये तक मासिक वेतन प्राप्त करने वाले नये कर्मचारियों को अधिकतम 15000 रुपये तक का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा पात्र संस्थानों को प्रत्येक नये रोजगार सृजन पर अधिकतम 3000 रुपये तक प्रति कर्मचारी प्रति महीने का वित्तीय प्रोत्साहन भी मिलेगा। इस योजना के तहत कर्मचारी को न्यूनतम छह माह के लिए नियुक्त रखना अनिवार्य है तथा योजना का लाभ दो वर्षों तक देय होगा। विनिर्माण (मैनुफेक्चुरिंग) क्षेत्र के लिए यह लाभ अतिरिक्त दो वर्षों के लिए बढ़ाया जाएगा। इस प्रकार यह योजना देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

उन्होंने बताया कि ईपीएफओ द्वारा कर्मचारी नामांकन अभियान-2025 शुरू किया गया है जो कि गत एक नवम्बर से अगले वर्ष 30 अप्रैल तक लागू रहेगा। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा अधिसूचित यह विशेष अनुपालन अभियान नियोक्ताओं को एक जुलाई 2017 से 31 अक्टूबर 2025 की अवधि के दौरान ईपीएफ कवरेज/ सदस्यता से छूटे हुए पात्र कर्मचारियों को स्वेच्छा से घोषित करने और नामांकित करने, तथा उनके पिछले अनुपालन को नियमित करने की अनुमति देता है। इसके तहत प्रत्येक पात्र संस्थान को केवल 100 रुपये की क्षति जमा करना होगा। इस अभियान के तहत कर्मचारियों की घोषणा करने वाले या नए सिरे से पंजीकरण कराने वाले नियोक्ता भी पीएमवीबीआरवाई योजना के अंतर्गत लाभ के पात्र होंगे।

पेंशनभोगियों की सुविधा के लिए हाल में ईपीएफओ ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसके तहत आईपीपीबी अपने 1.65 लाख डाकघरों और बायोमेट्रिक उपकरणों से लैस तीन लाख से अधिक डाकियों/ग्रामीण डाक सेवकों के नेटवर्क का उपयोग करके ईपीएफओ पेंशनभोगियों को घर बैठे फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलोजी (एफएटी) या फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक्स का उपयोग करके अपने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में मदद करेगा। यह सेवा निःशुल्क होगी और इसका सारा खर्च ईपीएफओ वहन करेगा।

श्री कुमार ने ईपीएफओ के हालिया पहलों, सुधारों एवं नवाचारों के बारे में अवगत कराते हुए बताया कि ईपीएफओ ने दावा फ़ाइल करने की प्रक्रिया का सरलीकरण करते हुए सभी सदस्यों के लिए ईपीएफ दावा करते समय स्कैन किये गये चेक या बैंक पासबुक अपलोड करने की आवश्यकता समाप्त कर दी है। साथ ही जटिलता को कम करने के लिए आंशिक आहरण श्रेणियों को समेकित किया गया है। सदस्य अब बैंक सत्यापन के बाद नियोक्ता की अनुमति के बिना अपने बैंक खाते को अपने यूएएन से लिंक कर सकते हैं। पेंशनभोगियों की सुविधा के लिए केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली (सीपीपीएस) प्रणाली लागू की गयी है जिसके तहत वे देश भर के किसी भी बैंक से पेंशन प्राप्त कर सकते हैं एवं साथ ही नियोक्ताओं की सुविधा के लिए संशोधित इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-रिटर्न (ईसीआर) फाइलिंग प्रणाली शुरू की गयी है।

राजस्थान अंचल में नवाचारों का जिक्र करते हुये उन्होंने बताया कि पहलें भी शुरू की हैं, जिसमे 'ऑफिसर ऑफ द डे' प्रमुख है, जिसके अंतर्गत प्रदेश के सभी पांच क्षेत्रीय एवं सात जिला कार्यालयों में ईपीएफओ सदस्यों एवं पेंशनरों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए सभी जनसंपर्क केंद्रों में प्रतिदिन एक घंटा कार्यालय के एक उच्चाधिकारी जनसंपर्क केंद्र पर आगंतुकों की समस्याओं का समाधान करते है। साथ ही सभी कार्यालयो मे एक समर्पित मृत्यु दावा प्रकोष्ठ स्थापित की गयी है ताकि शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के लिए दावा निपटान प्रक्रिया तीव्र की जा सके।

उन्होंने बताया कि ये सभी योजनाएं एवं पहलें ईपीएफओ के सदस्यों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' एवं नियोक्ताओं के लिए 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देंगी।

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