चेन्नई , फरवरी 22 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच एस रामदास के नेतृत्व वाले पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) गुट को झटका देते हुए 'आम' चुनाव चिह्न के उपयोग संबंधी उनकी दो याचिकाएं खारिज कर दीं हैं।
डॉ. रामदास ने चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की थी कि उनके गुट को तमिलनाडु तथा पड़ोसी केन्द्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में 'आम' चिह्न का उपयोग करने की अनुमति दी जाए। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो उनके पुत्र अंबुमणि रामदास की अगुवाई वाले पीएमके गुट को इसका उपयोग करने से रोका जाये।
मुख्य न्यायाधीश एम.एम. श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने निर्वाचन आयोग के स्थायी अधिवक्ता की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल के गुटीय विवाद का समाधान दीवानी अदालत के आदेश के माध्यम से ही हो सकता है। आयोग को इस प्रकार का निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है।
पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि पार्टी अध्यक्ष पद को लेकर पिता-पुत्र के बीच विवाद संबंधी सिविल वाद पहले ही दायर किया जा चुका है। ऐसे में याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय के बजाय सिविल न्यायालय का रुख करना चाहिए था। सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने यह भी पूछा कि विवाद का समाधान मध्यस्थता के माध्यम से क्यों नहीं किया जा सका।
अंबुमणि गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय नारायण ने कहा कि अगस्त 2025 में न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने दोनों पक्षों को आपसी सुलह के लिए बुलाया था, परंतु प्रयास सफल नहीं हुआ।
यह उल्लेखनीय है कि निर्वाचन आयोग पहले ही अंबुमणि रामदास को पार्टी अध्यक्ष के रूप में मान्यता दे चुका है। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद अंबुमणि गुट को ही 'आम' चुनाव चिह्न के उपयोग तथा नामांकन पत्रों में प्रपत्र 'ए' और 'बी' पर हस्ताक्षर करने का अधिकार प्राप्त होगा।
इस बीच, अंबुमणि गुट ने आगामी चुनावों के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ समझौता किया है, जिसमें अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शामिल हैं। उन्होंने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम को सत्ता से हटाने का संकल्प व्यक्त किया है।
उत्तरी तमिलनाडु के विल्लुपुरम, धर्मपुरी और कृष्णागिरि जैसे जिलों में प्रभाव रखने वाली यह ओबीसी-वन्नियार बहुल पार्टी नेतृत्व विवाद के चलते दो हिस्सों में बंट चुकी है। दोनों गुट अलग-अलग आम परिषद की बैठकें कर स्वयं को वैध अध्यक्ष घोषित करते रहे हैं।
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