नाभा , मार्च 30 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' (पीएमकेवीवाई) के तहत प्रशिक्षित महिलाओं को बाजार तक पहुंच तथा उचित मूल्य न मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और इस स्थिति के लिए पंजाब सरकार की प्रशासनिक विफलता को जिम्मेदार ठहराया।
श्री कैंथ ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस और परिणामोन्मुखी प्रयास कर रही है। पीएमकेवीवाई के माध्यम से महिलाओं को मुफ्त कौशल प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और आर्थिक सशक्तिकरण के मार्ग प्रदान किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी 2024-25 में 22.79 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 25.80 प्रतित हो गई है, जो योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है। महिलाओं को इलेक्ट्रॉनिक्स, रिटेल, हेल्थकेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, हस्तशिल्प और परिधान जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें परिवहन, आवास और प्रशिक्षण के बाद रोजगार सहायता जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि सरकार का दृष्टिकोण "महिलाओं का विकास" से बदलकर अब "महिला नेतृत्व वाला विकास" हो गया है, जहाँ महिलाएँ राष्ट्र की प्रगति की सक्रिय चालक हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रयासों के बावजूद, मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की लापरवाही के कारण पंजाब में जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच रहा है। नाभा विधानसभा क्षेत्र के गांवों में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान, कैंथ ने पाया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बावजूद महिलाएं अपने उत्पादों के लिए उचित बाजार या सही कीमत पाने में असमर्थ हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता का स्पष्ट उदाहरण बताया।
उन्होंने आश्वासन दिया कि स्वयं सहायता समूहों को सीधे बैंकों से जोड़ा जाएगा। केंद्रीय योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। महिलाओं को सीधे बाजार और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सहकारी बैंकों और संबंधित विभागों में हो रही देरी यह दर्शाती है कि राज्य सरकार जन कल्याण के बजाय राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रही है। कैंथ ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने अपना रवैया तुरंत नहीं बदला, तो जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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