आइजोल , मार्च 29 -- विदेशी नागरिकों के लिए संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) जारी करने में लगातार हो रही देरी ने मिजोरम की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस सुस्ती की वजह से एक ऐसा 'ग्रे ज़ोन' बन गया है, जिसके चलते कई विदेशी बिना अनिवार्य मंजूरी के राज्य में प्रवेश कर रहे हैं।
मिजोरम पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि पीएपी की प्रक्रिया में अधिक समय लगने के कारण कई विदेशी पर्यटक राज्य में तैनात गृह मंत्रालय के अधिकारियों से अनौपचारिक मंजूरी ले लेते हैं। इससे वे विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) की औपचारिक ऑनलाइन अनुमति मिलने से पहले ही अपनी यात्रा शुरू कर देते हैं।
पीएपी पूर्वोत्तर के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों-अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड- की यात्रा करने वाले विदेशियों के लिए अनिवार्य है। हालांकि, संरक्षित क्षेत्र शासन (पीएआर) में 2027 तक ढील दी गयी थी, लेकिन केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 17 दिसंबर 2024 से पाबंदियां फिर से लागू कर दी हैं।
अधिकारी के अनुसार, व्यवस्था में देरी के कारण कई विदेशी बिना पीएपी के मिजोरम में दाखिल हुए हैं। उन्होंने म्यांमार सीमा के पास सियाहा जिले के लाकी गांव में इस हफ्ते पकड़े गये एक 53 वर्षीय स्लोवाक नागरिक का उदाहरण दिया। वह आइजोल से दक्षिण मिजोरम होते हुए म्यांमार जा रहा था, जहां उसे एक उत्सव में आमंत्रित किया गया था। उसे शुक्रवार को लेंगपुई हवाई अड्डे से वापस भेज दिया गया।
एक अन्य मामले में इगोर बाबको नामक 41 वर्षीय रूसी नागरिक को बिना वैध पीएपी के त्रिपुरा के कंचनपुर से ममित जिले के राजीव नगर गांव में प्रवेश करने पर हिरासत में लिया गया। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने उसे पकड़कर स्थानीय पुलिस को सौंपा।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दिल्ली स्थित सुरक्षा थिंक टैंक के उन दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जिनमें इस रूसी नागरिक का संबंध बांग्लादेश के विद्रोही समूह 'पर्वतीय चट्टग्राम जन संहति समिति' (पीसीजेएसएस) से बताया गया था।
पुलिस अधिकारी ने कहा, "उसके किसी आतंकी संबंध का संदेह नहीं है।" उस व्यक्ति को बाद में असम के रास्ते वापस भेज दिया गया।
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