नई दिल्ली , दिसंबर 3 -- पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योगमंडल (पीएचडीसीसीआई) ने स्वर्ण अयस्क कंसन्ट्रेट (एचएसएन26169010) पर आयात शुल्क शून्य किये जाने और घरेलू सोना प्रसंस्करण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू करने की सिफारिश की है।
पीएचडीसीसीआई ने बुधवार को कहा कि स्वर्ण परिशोधन क्षेत्र की पीएलआई योजना से देश में सोने की उत्पादन क्षमता का विस्तार, तकनीकी उन्नयन और इस क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। पीएचडी की यह सिफारिश ऐसे परिप्रेक्ष में है जबकि भारत का सोना उद्योग खपत के मामले में वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है।
भारत में सोने की अधिकांश मांग आयात के माध्यम से पूरी होती है।
पीएचडीसीसीआई ने वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि देश में 2024 में सोने की मांग में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका एक कारण आयात शुल्क में कमी भी थी ।
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने एक बयान में कहा कि भारत में 2025 के लिए सोने की मांग की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं और अगले तीन वर्षों के दौरान देश की सोने के की मांग 700 से 800 टन वार्षिक के बीच रहने की उम्मीद है।
श्री जुनेजा ने कहा कि देश में स्वर्ण-अयस्क परिशेधन उद्योग को बढ़ावा देना, भारत की रणनीतिक खनिज सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
श्री जुनेजा ने यह भी कहा कि इस समय देश में जहां तांबे के अयस्क कंसन्ट्रेट के आयात पर शुल्क शून्य है और इसके उप-उत्पाद के रूप में सालाना लगभग 12 टन सोने की प्राप्ति होती है, वहीं सोने के अयस्क कंसन्ट्रेट पर शुल्क अब भी 2.5 प्रतिशत की दर के साथ ऊंचा रखा गया है। उन्होंने कहा, देश में स्वर्ण परिशोधन उद्योग के प्रोत्साहन के लिए इस पर शुल्क को व्यावाहरिक बनाये जाने की सिफारिश की है।
उनकी राय में सोने पर आयात शुल्क को 15 प्रतिशत से घटाकर 2014-25 के बजट में 6 प्रतिशत करने से सोने का सीधे आयात घरेलू रिफाइनिंग की तुलना में कहीं अधिक आकर्षक हो गए हैं।
पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव रंजीत मेहता ने कहा कि भारतीय सोना प्रसंस्करण और विनिर्माण उद्योग का भविष्य आशाजनक दिख रहा है, जिसका रोजगार, निवेश, व्यापार संतुलन और सरकारी राजस्व पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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