पिथौरागढ़ , मार्च 11 -- उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में प्रथम हिमालयन कल्चरल कॉर्निवाल का आयोजन किया जाएगा जिसके लिए तैयारियां तेज हो गई हैं।

बुधवार को जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, व्यवस्थाओं एवं विभिन्न गतिविधियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि कॉर्निवाल में हिमालयी राज्यों लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों को आमंत्रित किया जाएगा। इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को एक मंच प्रदान करना है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि आयोजन के लिए विभिन्न समितियों का गठन कर उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएं। इसके तहत मंच निर्माण, स्वागत-सत्कार, निमंत्रण, आवास और प्रचार-प्रसार सहित अन्य समितियां बनाई जाएंगी। साथ ही विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित करने पर भी चर्चा हुई।

मौसम की अनुकूलता को देखते हुए कॉर्निवाल का आयोजन अक्टूबर माह में कराने का प्रस्ताव रखा गया है, जिस पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर पर्यटन विभाग से विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। कार्यक्रम के आयोजन स्थल के रूप में देव सिंह मैदान और रामलीला मैदान, पिथौरागढ़ को प्रस्तावित किया गया है।

कॉर्निवाल के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें छोलिया नृत्य, रम्मान नृत्य, हिल जात्रा, रं समाज का शौका नृत्य, भजन संध्या, ऐपण प्रतियोगिता, पुलिस और आर्मी बैंड की प्रस्तुति, फैशन शो, स्कूल के बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्टार नाइट शामिल होंगे।

इसके अलावा फूड फेस्टिवल, शिल्पकार दीर्घा, फोटोग्राफी प्रदर्शनी, पेंटिंग इंटर-स्कूल प्रतियोगिता, थिएटर और फिल्म फेस्टिवल के साथ ब्रह्मांड दर्शन जैसे आयोजन भी प्रस्तावित हैं, जिनमें स्थानीय कलाकारों और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

युवाओं को जोड़ने के लिए खेल और पूर्व-कार्यक्रम गतिविधियों के तहत शतरंज, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, बाइक रैली और योग कार्यक्रमों के आयोजन पर भी चर्चा की गई। वहीं साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राफ्टिंग, ट्रैकिंग, पैराग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलूनिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियों की भी योजना है।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि आपसी समन्वय के साथ इस कार्यक्रम को भव्य, सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाने के लिए कार्य करें, ताकि यह आयोजन पिथौरागढ़ और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

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