हैदराबाद , जनवरी 04 -- तेलंगाना राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष वकुलाभरणम कृष्ण मोहन राव ने रविवार को कहा कि संख्यात्मक बहुमत होने के बावजूद पिछड़े वर्ग (बीसी) को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व न मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक गंभीर खामी बनकर उभरा है।

सोमाजीगुडा प्रेस क्लब में बीसी जाति संघों के संयुक्त मंच द्वारा आयोजित एक बैठक में मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण मोहन राव ने कहा कि बीसी का राजनीतिक अधिकार किसी दान का विषय नहीं है, बल्कि यह केवल संगठित और सामूहिक संघर्ष से ही हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जब तक बीसी की संख्या को निर्णय लेने की शक्ति में नहीं बदला जाता, तब तक हाशिए पर धकेले जाने की स्थिति बनी रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जनगणना के साथ जाति जनगणना को शामिल करने के निर्णय के लिए धन्यवाद दिया और इसे तथ्यों पर आधारित नीति निर्माण तथा पिछड़े वर्गों के लिए सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम कदम बताया।

डॉ. राव ने तेलंगाना सरकार से अलग बीसी अत्याचार अधिनियम लागू करने की मांग करते हुए कहा कि सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किए बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण लागू किए बिना चुनाव कराए गए, तो यह लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ होगा।

उन्होंने कहा, "सामाजिक लोकतंत्र के बिना राजनीतिक लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता।" उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के बिना लोकतंत्र अधूरा है। उन्होंने ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, पेरियार, नारायण गुरु, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर और डॉ. बी.आर. आंबेडकर जैसे समाज सुधारकों के सामाजिक समानता के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अब तक पूरी तरह साकार नहीं हो पाए हैं। उन्होंने इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बीसी समुदाय में अधिक एकता का आह्वान किया।

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