रायपुर , जनवरी 09 -- छत्तीसगढ़ सरकार की खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए लागू पारदर्शी एवं डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था, प्रदेश के किसानों के लिए भरोसे का प्रतीक बनकर उभर रही है।
कोड़ा उपार्जन केंद्र पर 46.40 क्विंटल धान का सफल विक्रय करने वाले ग्राम सलका के किसान बृजलाल ने नई व्यवस्था पर संतोष जताते हुए कहा, "पहले तौल और भुगतान में देरी होती थी, लेकिन इस बार की पारदर्शी प्रक्रिया ने हमारा विश्वास बढ़ाया है। अब समय पर मिलने वाली राशि से रबी फसल की तैयारी और घरेलू जरूरतों की योजना बनाना आसान हुआ है।"इस व्यवस्था के तहत सरकार द्वारा निर्धारित 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की गारंटी के साथ-साथ ऑनलाइन टोकन, डिजिटल तौल तथा बिक्री राशि का सीधे बैंक खाते में त्वरित भुगतान जैसे कदमों ने प्रक्रिया को सुगम बनाया है। केंद्रों पर किसानों के लिए बैठने और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है।
राज्य के एक वरिष्ठ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग अधिकारी के मुताबिक, "डिजिटलीकरण और सीधे लाभार्थी हस्तांतरण (डीबीटी) का उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करते हुए किसान को उसकी उपज का पूरा और समय पर लाभ दिलाना है। बृजलाल जैसे किसानों का अनुभव इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है।" मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली इस किसान-हितैषी नीति से प्रदेश के हजारों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह सुधार कृषि विपणन प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव किसानों की आर्थिक स्थिति एवं खेती के प्रति उनके विश्वास पर पड़ने की संभावना है।
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