जयपुर , जनवरी 02 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन देने की जरुरत बताते हुए कहा है कि भारतीय कलाओं से प्रेरणा लेकर ही पश्चिम देशों ने बहुत से आविष्कार किये, हमारी कला और कारीगरी को लूट ले गये पर हमारे पारंपरिक कलाकारों ने कलाओं को सदा जीवित रखा है।
श्री बागडे शुक्रवार को राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में दृश्यकला विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय महिला लोक कला शिविर का शुभारंभ करने के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि इसलिए पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। राज्यपाल ने इस दौरान देश के विभिन्न प्रांतों से आयी कलाकारों से संवाद भी किया।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी हस्तकलाओं, चित्रकला आदि से जुड़े कुटीर और घरेलू उद्योग बंद किये। घरेलू उद्योग बंद कर लोगों को भूखे रहने पर इसलिए मजबूर किया गया कि देश की संस्कृति को जड़ से समाप्त कर दिया जाए और लोग सदा गुलाम बने रहे।
राज्यपाल ने कहा कि अंग्रेजों को यह बात मालूम नहीं थी कि कपास से कपड़ा बनता है। भारत में आकर उन्होंने यह जाना। उन्होंने अजंता की चित्रकला का प्रदर्शन करते हुए कहा कि सातवीं सदी में हमारे यहां जहाज के चित्र मिले हैं। हमारे यहां ऐसी कलाकृतियां बनती थी जिनके रंग कभी फीके नहीं पड़ते थे। उन्होंने कहा कि भारतीय कलाओं से प्रेरणा लेकर ही पश्चिम के देशों ने बहुत से आविष्कार किये।
श्री बागडे ने कहा कि लोक कलायें और शिल्प स्थान विशेष की संस्कृति और जीवन को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान कलाओं का गढ़ रहा है। उन्होंने महिला चित्रकला और शिल्प शिविर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे कला शिविर पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के साथ इनसे जुड़ी आधुनिक कला दृष्टि से विद्यार्थियों को जोड़ते हैं।
राज्यपाल ने कला शिविर के तहत लगाये गये लोक कला स्टॉल का भी अवलोकन किया। उन्होंने बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल आदि से आये लोक कलाकारों की कला के बारे में भी जानकारी ली। कला शिविर में देश के विभिन्न राज्यों की 32 महिला कलाकार भाग ले रहीं हैं।
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