श्रीगंगानगर , दिसम्बर 06 -- राजस्थान में सर्वाधिक सरसब्ज जिले श्रीगंगानगर में इस वर्ष गन्ने का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में करीब आधा रहने की आशंका जतायी जा रही है।
पानी की अपर्याप्त उपलब्धता को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है, जिससे शुगर मिल में चीनी उत्पादन भी प्रभावित होगा। मिल प्रबंधन ने पिराई सत्र की तैयारी शुरू कर दी है और इसे 24 दिसम्बर से प्रारंभ करने की योजना है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को श्रीगंगानगर में गंगनहर शिलान्यास शताब्दी समारोह का उद्घाटन करते हुए दावा किया था कि इस वर्ष श्रीगंगानगर और पड़ोसी हनुमानगढ़ जिलों के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त से अधिक पानी उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कोशिशों से किसानों की पानी संबंधी मांगें न्यूनतम रही हैं और कोई बड़ा आंदोलन या धरना नहीं हुआ। जमीनी हकीकत हालांकि इससे अलग नजर आ रही है।
गन्ना उत्पादक किसान संघर्ष समिति श्रीगंगानगर के अध्यक्ष सतविंदरपाल सिंह ने शुक्रवार को बताया कि इस वर्ष गन्ने की बुआई के समय और उसके बाद पंजाब से गंगनहर में पर्याप्त पानी नहीं मिला। इससे कई किसानों ने गन्ने की बुआई ही नहीं की, जबकि जिन्होंने की, उनकी फसल पानी की कमी से प्रभावित हुई। कुछ किसानों को फसल खराब होने पर दूसरी फसलों की बुआई करनी पड़ी।
सतिंदरपाल सिंह ने कहा कि पिछले वर्षों में श्रीगंगानगर जिले में गन्ने का उत्पादन औसतन 22 लाख क्विंटल तक पहुंचता रहा है, लेकिन इस बार यह घटकर लगभग 12 लाख क्विंटल रहने की आशंका है। पिछले वर्ष पानी की स्थिति बेहतर होने से उत्पादन 15 लाख क्विंटल तक पहुंचा था और शुगर मिल में करीब 12 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई हुई। इस वर्ष उत्पादन मुश्किल से 12 लाख क्विंटल तक पहुंचेगा, लेकिन मिल को मात्र 10 लाख क्विंटल गन्ना ही उपलब्ध होने की संभावना है। शेष गन्ना किसान गुड़ या अन्य उत्पाद बनाने वालों को बेच देते हैं, जबकि कुछ मात्रा पड़ोसी पंजाब के फाजिल्का जिले की शुगर मिल में जाती है। दोनों राज्यों में गन्ने का समर्थन मूल्य करीब समान है, लेकिन पंजाब ले जाने में किसानों को अतिरिक्त परिवहन खर्च वहन करना पड़ता है।
इस बीच, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और श्रीकरणपुर विधायक रूपेंद्र सिंह रूबी ने मुख्यमंत्री की घोषणा पर सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि भजनलाल शर्मा नेगन्ने के समर्थन मूल्य में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की घोषणा करके वाहवाही लूट ली, लेकिन यह कोई नयी या विशेष पहल नहीं है। श्रीगंगानगर शुगर मिल के लिए एक पुराना फॉर्मूला है, जिसमें पंजाब और हरियाणा में दिये जाने वाले मूल्य के बराबर ही राजस्थान में मूल्य दिया जाता है। पूर्ववर्ती सरकारें भी इसी फॉर्मूले का पालन करती रहीं हैं। पंजाब में भी समर्थन मूल्य में करीब इतनी ही बढ़ोत्तरी हुई है, इसलिए राजस्थान सरकार ने सिर्फ इसका अनुसरण किया है। स्थानीय गन्ना उत्पादक किसान अच्छी तरह जानते हैं कि अगर पंजाब-हरियाणा में मूल्य बढ़ता है, तो उन्हें भी बढ़ा हुआ मूल्य मिलेगा।
उधर, शुगर मिल प्रबंधन ने आगामी पिराई सत्र की तैयारी तेज कर दी है। मिल में मरम्मत का कार्य जोरों पर चल रहा है। अगले कुछ दिनों में किसानों को गन्ना मिल में लाने के लिए पर्चियां वितरित की जाएंगी। जैसे ही पर्चियां मिलनी शुरू होंगी, किसान गन्ने की कटाई में जुट जाएंगे। सूत्रों के अनुसार पिराई सत्र का मुहूर्त 24 दिसम्बर का निकला है, इसलिए इसी तारीख से कार्य शुरू होने की संभावना है।
पिछले वर्षों में जब जिले में गन्ने का उत्पादन 20-22 लाख क्विंटल तक पहुंचता था, तब पिराई सत्र चार महीने तक चलता था, लेकिन अब पानी की कमी और गन्ने के रकबे में कमी से उत्पादन घट रहा है। इससे किसानों का गन्ने से मोहभंग हो रहा है।
कभी श्रीगंगानगर के गन्ने की लंबाई और मिठास की दुनिया भर में सराहना होती थी। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी जिले के कई किसानों को उनकी शानदार फसल के लिए सम्मानित किया था, लेकिन अब यह अतीत की बात हो गयी हैं। न तो पहले जैसी उपजाऊ जमीन बची है, न ही वैसी मेहनत करने वाले किसान। पानी की कमी ने गन्ना उत्पादन को गंभीर चुनौती पेश की है, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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