नयी दिल्ली , जनवरी 14 -- जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा है कि सरकार नदियों को केवल जलमार्ग के रूप में नहीं, बल्कि जीवन-सहायक पारिस्थितिकी के रूप में संरक्षित करने के लिये प्रतिबद्ध है और नदी स्वास्थ्य का सच्चा सूचक जलीय जैव विविधता का फलना-फूलना है।
श्री पाटिल ने बुधवार को उत्तराखंड के देहरादून में भारतीय वन्यजीव संस्थान में नमामि गंगा मिशन के तहत कई महत्वपूर्ण पहलों का उद्घाटन किया। उन्होंने गंगा नदी में जैव विविधता संरक्षण के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन परियोजना के परिणामों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि भारत अब न केवल अपनी नदियों को साफ करने बल्कि उनकी जैव विविधता, जलीय जीवन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं कि आने वाली पीढ़ियां को एक स्वस्थ, संतुलित और जीवनदायी नदी प्रणाली विरासत में मिले।
केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस का उद्घाटन भी किया और कहा "इससे डॉल्फिन संरक्षण के लिए जारी प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। यह एम्बुलेंस गंगा डॉल्फिनों के लिए शीघ्र, संवेदनशील और वैज्ञानिक रूप से सुसज्जित जीवन रक्षक सहायता प्रदान करेगी। डॉल्फिन नदी के स्वास्थ्य का एक संवेदनशील संकेतक है और एम्बुलेंस डॉल्फिन संरक्षण और बचाव का एक बड़ा प्रयास है।"श्री पाटिल ने इस दौरान वर्ल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के शोधकर्ताओं और एमएससी छात्रों से भी बातचीत की। नमामि गंगा कार्यक्रम के तत्वावधान में संस्थान ने मीठे जल के संरक्षण में दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें छात्रों को विज्ञान, क्षेत्र कार्य और नीतिगत अध्ययनों के माध्यम से भारत की नदियों, आर्द्रभूमि और मीठे जल के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने और संरक्षित करने का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि भविष्य के लिए नदी पुनर्स्थापन, जैव विविधता और सतत जल प्रबंधन को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके।
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