चेन्नई , फरवरी 08 -- पांडिचेरी विश्वविद्यालय में 'पशु कल्याण और प्रयोगों में नैतिकता तथा विनियामक दिशानिर्देशों' पर रविवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसे पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण हेतु समिति (सीसीएसईए) का भी समर्थन प्राप्त था।

यह संगोष्ठी पशु-आधारित अनुसंधान में नैतिक जिम्मेदारी और विनियामक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संस्थान के नवाचार परिषद और संस्थागत पशु नैतिकता समिति के सहयोग से आयोजित की गई थी।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार पशु-आधारित अनुसंधान आधुनिक जैव चिकित्सा विज्ञान के आधार स्तंभ के रूप में कार्य कर रहा है, जो चिकित्सीय नवाचारों और ट्रांस्लेशनल चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस संदर्भ में, संगोष्ठी का उद्देश्य वैज्ञानिक समुदाय के बीच नैतिक चेतना, विनियामक साक्षरता और जिम्मेदार अनुसंधान प्रथाओं को बढ़ावा देना था।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश बाबू ने अपने संबोधन में कहा कि सीसीएसईए अपने कार्यों के माध्यम से अनुसंधान में बेजुबान जानवरों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने इन विट्रो डेटा की पुष्टि करने और अनुसंधान की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में इन विवो मॉडल के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला।

सीसीएसईए के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. विवेक त्यागी ने संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए पशु कल्याण और पशु प्रयोगों में विनियामक दिशानिर्देशों पर जोर दिया।

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