पटना , मार्च 24 -- पांच दिवसीय महिला नाट्य उत्सव के तीसरे दिन प्रेमचंद रंगशाला में नाटक "फर्क है" का मंचन किया गया।
मंजरी मणि त्रिपाठी निर्देशित यह नाटक एक स्कूल में घटित होने वाली यथार्थ घटनाओं पर आधारित है, जो समाज में व्याप्त वर्गभेद, अवसरों की असमानता और भावनात्मक आघात जैसे संवेदनशील विषयों को बच्चों की दृष्टि से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। यह प्रस्तुति दर्शाती है कि किस प्रकार विद्यालय जैसे संवेदनशील वातावरण में भी भेदभाव की भावना जन्म लेती है और बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डालती है।
नाटक में उच्च वर्ग के बच्चों द्वारा स्वयं को श्रेष्ठ मानने की मानसिकता और वहीं स्लम क्षेत्र से आए बच्चों का संघर्ष, आत्मविश्वास एवं प्रतिभा के माध्यम से आगे बढ़ने का जज्बा मार्मिक रूप से उकेरा गया है। कथा में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है जब 'रानी' जैसे साधारण परिवेश से आने वाले बच्चे अपनी प्रतिभा से सभी का दिल जीत लेते हैं। इस घटना से न केवल शिक्षकों की सोच में बदलाव आता है, बल्कि अन्य बच्चों को भी आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।नाटक का मुख्य संदेश अत्यंत स्पष्ट और विचारोत्तेजक है कि यदि शिक्षक ही भेदभाव करेंगे तो बच्चों का मार्गदर्शन कौन करेगा?क्या सपनों और अधिकारों के बीच भी कोई भेद होना चाहिए? बच्चे भेदभाव लेकर जन्म नहीं लेते, वे वही सीखते हैं जो समाज उन्हें सिखाता है।
कार्यक्रम में बिहार संगीत नाटक अकादमी के सचिव महमूद आलम तथा सहायक सचिव कीर्ति आलोक समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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