कोच्चि , अक्टूबर 31 -- केंद्र सरकार समुद्र में मछली पकड़ने के कारोबार में लगे लोगों की पांचवीं राष्ट्रीय जनगणना अगले सप्ताह से शुरू करने जा रही है और इसके लिए घर-घर जा कर मुख्य सूचनाएं एकत्रित करने का काम तीन नवंबर से 18 दिसंबर तक किया जाएगा।
मत्स्योद्योग जनगणना में तटीय क्षेत्रों के 5000 से अधिक गांवों और बस्तियों के 12 लाख से अधिक परिवारों की आबादी , उनकी स्थिति और उद्योग से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की अद्यतन सूचनाएं जुटायी जायेंगी ताकि इस क्षेत्र के विकास की सम्यक योजना तय करने में मदद मिले।
केंद्र सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने शुक्रवार को यहां राष्ट्रीय समुद्री मत्स्योद्योग जनगणना 2025 (एमएफसी 2025) में प्रयोग किये जाने वाले व्यास भारत और व्यास-सूत्र डिजिटल ऐप का शुभारंभ किया। मत्स्यपालन , पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति में बताया कि यह राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल प्रौद्योगिकी के समावेश का एक ऐतिहासिक सूत्रपात है। इसमें सूचनाएं कागज में भरने की परम्परागत विधि अपनाने की आवश्यकता नहीं होगी।
डिजिटल ऐप की मदद से इस पूरी प्रक्रिया में लोगों के बारे में विस्तृत, सूक्ष्मतर राष्ट्रीय डाटा संग्रह तैयार होगा जिसमें सटीक भौगोलिक स्थिति का डाटा भी शामिल होगा। पिछली मत्स्योद्योग गणना 2016 में हुई थी। इस गणना में पहली बार अपनाए जा रहे दो डिजिटल ऐप में व्यास-भारत तटीयी मछुआरा बस्तियों में परिवारों और उनके सदस्यों की सूचनाओं की गणना के लिए है। व्यास-सूत्र ऐप मत्स्य जनगणना में लगे गणनाकर्मियों के काम के पर्यवेक्षण और निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
मत्स्य जनगणना 2025 का वित्तपोषण केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग कर रहा है। आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) इसके लिए नोडल एजेंसी है तथा भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई) को इसमें परिचालन भागीदार बनाया गया है।
मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस मत्स्य जनगणना में समुद्री मछली पकड़ने के काम में लगे लोगों के 5,000 गांवों में 12 लाख से अधिक घरों के लोगो की गणना की जाएगी। इस काम में विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए मोबाइल-आधारित डिजिटल ऐप की मदद से 1,200 से अधिक लैंडिंग केंद्रों, 50 मछली पकड़ने के काम से जुड़े बंदरगाहों, जेटी, बाजारों और प्रसंस्करण संयंत्रों में मछुआरों, मछली पकड़ने की कला, साजो-सामान और बुनियादी ढांचे की स्थिति की गणना भी होगी।
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