नैनीताल , अप्रैल 01 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पहाड़ों की रानी मसूरी में बिना अनुमति पेड़ काटने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से पेड़ों के कटान पर रोक लगा दी है। अदालत ने मंसूरी नगर पालिका को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर किसकी अनुमति से बांज के पेड़ काटे जा रहे हैं।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश म्यूनिसिपल पोस्ट ग्रेजुएट कालेज (एमपीजी कॉलेज) परिसर की भूमि पर सड़क और खेल मैदान निर्माण के लिए पेड़ काटे जाने के खिलाफ दायर छात्रसंघ अध्यक्ष प्रवेश राणा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

याचिका में कहा गया कि मसूरी एमपीजी काॅलेज की लगभग दो एकड़ भूमि पर स्थित हॉस्टल क्षेत्र में नगर पालिका द्वारा वन विभाग की अनुमति के बिना बांज के पेड़ काटे, जबकि इन पेड़ों की सुरक्षा के लिए 1948 का कानून लागू है और पेड़ कटान से पहले अनुमति लेना अनिवार्य है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तस्वीरें भी कोर्ट में पेश कीं। शुरुआत में नगर पालिका की ओर से इन तस्वीरों पर आपत्ति जताई गई, लेकिन वन विभाग ने पुष्टि की कि तस्वीरें उसी स्थल की हैं। राज्य सरकार की ओर से भी अदालत को बताया गया कि इस मामले में नगर पालिका द्वारा कोई अनुमति नहीं ली गई।

सभी पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए पेड़ों के कटान पर रोक लगा दी। साथ ही, नगर पालिका, राज्य सरकार और वन विभाग को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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