कोलकाता , फरवरी 08 -- पश्चिम बंगाल सरकार ने चुनाव आयोग को सूचित किया है कि वह राज्य की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य के लिए 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों को नियुक्त करने की स्थिति में है।
राज्य के सचिवालय सूत्रों ने कहा कि राज्य सरकार ने एक औपचारिक संवाद के माध्यम से आयोग को यह जानकारी दे दी है। यह संवाद उच्चतम न्यायालय में एसआईआर से जुड़े मामले की सुनवाई से ठीक पहले हुआ है।
इस सुनवाई में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बार फिर व्यक्तिगत रूप से राज्य का पक्ष रखने की उम्मीद है, जैसा कि उन्होंने पिछली सुनवाई के दौरान किया था।
बुधवार को हुई पिछली सुनवाई में आयोग के वकील ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि पश्चिम बंगाल पुनरीक्षण कार्य के लिए पर्याप्त संख्या में ग्रुप-बी अधिकारी प्रदान करने में विफल रहा है, जिससे आयोग को राज्य के बाहर से अधिकारियों को लाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार को सोमवार तक उन ग्रुप-बी अधिकारियों की संख्या का स्पष्ट विवरण देने का निर्देश दिया था जिन्हें वह एसआईआर ड्यूटी के लिए उपलब्ध कराएगी।
उसी कार्यवाही के दौरान सुश्री बनर्जी ने चिंता जताई थी कि मतदाताओं को मामूली वर्तनी की गलतियों या उपनामों में बदलाव जैसी छोटी विसंगतियों के लिए सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है, जिससे अनावश्यक असुविधा हो रही है। इसके बाद न्यायालय ने आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि मामूली त्रुटियों के लिए किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से न हटाया जाए।
न्यायालय ने भाषा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए राज्य से बंगाली भाषा के जानकार अधिकारियों की एक सूची साझा करने को भी कहा, ताकि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान वर्तनी और समझ से जुड़ी समस्याओं को हल करने में मदद मिलेगी।
आयोग ने इससे पहले न्यायालय को सूचित किया था कि राज्य द्वारा अब तक केवल 80 ग्रुप-बी अधिकारियों को तैनात किया गया है, जो अपर्याप्त है। सुश्री बनर्जी ने हालांकि कहा कि 26 नवंबर से चल रहे एसआईआर में राज्य प्रशासन ने पूर्ण सहयोग दिया है।
इस बीच आयोग ने मतदाता सूचना पर्ची (वोटर इंफॉर्मेशन स्लिप) के वितरण के नियमों को कड़ा कर दिया है। बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को ईसीआई लोगो वाली मतदाता पर्चियां व्यक्तिगत रूप से घर-घर जाकर वितरित करना अनिवार्य हो गया है। इन पर्चियों में मतदाता का नाम, आयु, पता, ईपीआईसी नंबर, भाग और बूथ संख्या तथा मतदान केंद्र का नाम जैसे विवरण होंगे।
हालांकि 2018 के एक आदेश ने पहले ही यह जिम्मेदारी बीएलओ को सौंप दी थी, लेकिन चुनाव के दौरान यह कार्य अक्सर अनौपचारिक रूप से राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा संभाला जाता था। आयोग ने पारदर्शिता पर जोर देते हुए अब इस दिशा-निर्देश को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।
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