कोलकता , फरवरी 17 -- पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत नौ राज्य गठित सेवाओं (स्टेट कांस्टीट्यूटेड सर्विसेज) में विभिन्न वेतन स्तरों पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद सृजित किए जाएंगे।
मंत्रिमंडल के इस प्रस्ताव को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से अहम कदम माना जा रहा है।
यह निर्णय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक के बाद नबन्ना में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह कदम वरिष्ठ स्तर पर पदोन्नति में आ रही रुकावट (स्टैगनेशन) को कम करेगा और विभिन्न राज्य गठित सेवाओं के बीच समानता सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर भी इस निर्णय को "ऐतिहासिक" बताते हुए कहा कि पहली बार सभी राज्य गठित सेवाओं के कैडर शेड्यूल को समग्र रूप से अद्यतन किया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह फैसला राज्य सरकार के 46 विभागों से परामर्श के बाद लिया गया। साथ ही सिद्धांततः अन्य सभी राज्य गठित सेवाओं में भी इसी तरह अतिरिक्त पद सृजित करने की मंजूरी दे दी गई है।
पश्चिम बंगाल में राज्य गठित सेवाओं के अंतर्गत वैधानिक कैडर आधारित सेवाएं आती हैं। इनमें पश्चिम बंगाल सिविल सेवा के अधिकारी जैसे सब-डिविजनल ऑफिसर और डिप्टी मजिस्ट्रेट के अलावा न्यायिक अधिकारी (सिविल जज जूनियर और सीनियर डिविजन), डीएसपी और असिस्टेंट कमिश्नर रैंक के पुलिस अधिकारी, ऑडिट एवं अकाउंट्स, रजिस्ट्रेशन एवं स्टांप राजस्व, सहकारिता, श्रम, खाद्य एवं आपूर्ति तथा रोजगार विभाग के वरिष्ठ पद शामिल हैं।
प्रशासनिक हलकों में लंबे समय से उच्च पदों के पुनर्गठन और विस्तार की मांग उठ रही थी। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना था कि पदोन्नति के अवसर सीमित होने से ऊपरी स्तर पर ठहराव की स्थिति बनी हुई है।
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