कोलकाता , फरवरी 17 -- पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के मसौदे पर सुनवाई के दौरान जमा किये गये पहचान दस्तावेजों के सत्यापन को पूरा करने की 21 फरवरी की समय सीमा दो से तीन दिन बढ़ाई जा सकती है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने यह संकेत दिए हैं।
सूत्रों ने कहा कि इस संभावित देरी का मुख्य कारण पहचान प्रमाण के रूप में अपलोड किए गए अमान्य और अस्वीकृत दस्तावेजों की अधिक संख्या है।
अधिकारियों के अनुसार, चुनावी कर्मचारियों को ऐसी बड़ी मात्रा में सामग्री की छंटनी करनी पड़ रही है जो स्वीकार्य दस्तावेजों की निर्धारित सूची के अनुरूप नहीं है।
सूत्रों ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त 13 पहचान प्रमाण पत्रों के अलावा, अखबार की कतरनें, खाली पन्ने या ऐसी फाइलें अपलोड की गयी हैं, जिन्हें पढ़ा नहीं जा सकता।
एक अधिकारी ने कहा, "ऐसी सामग्री से वैध दस्तावेजों को अलग करना बेहद समय लेने वाला काम बन गया है, यही वजह है कि जांच की समय सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।"चुनाव अधिकारी पहले से अपलोड किए गए दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं और उन नए आवेदनों पर भी कार्रवाई कर रहे हैं जो सुनवाई के अंतिम चरण के दौरान आए थे।
सूत्रों ने बताया कि यदि दस्तावेजों को अपलोड करने की प्रक्रिया सुनवाई के साथ ही समाप्त हो गई होती, तो अधिकारी पूरी तरह से सत्यापन पर ध्यान केंद्रित कर सकते थे और देरी की संभावना कम हो जाती।
आयोग ने कथित तौर पर पांच जिलों कूचबिहार, मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना को गैर-सूचीबद्ध दस्तावेजों की अधिक संख्या के लिए चिह्नित किया है। ये पांचों जिले बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं, जबकि दक्षिण 24 परगना में एक लंबा तटीय क्षेत्र भी है। इसी तरह की हालांकि कम विसंगतियां पूर्व वर्धमान और पश्चिम वर्धमान में भी देखी गई हैं।
मौजूदा समय सारणी के तहत, पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होने वाली है।
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