कोलकाता , अप्रैल 02 -- पश्चिम बंगाल में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद चुनाव आयोग ने मालदा में हिंसा की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के गुरुवार को आपातकालीन वर्चुअल बैठक की जिसमें राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के साथ वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
यह बैठक शीर्ष अदालत के उस आदेश पर केंद्रित थी, जिसमें आयोग से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने पर विचार करने को कहा गया है। चर्चा में राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति और अदालत के निर्देशों के पालन के लिए जरूरी कदमों को भी शामिल किया गया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल, मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला, पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता, एडीजी (कानून-व्यवस्था) अजय मुकुंद रानाडे, कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद के साथ-साथ राज्य भर के जिला चुनाव अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों ने हिस्सा लिया।
यह घटनाक्रम मालदा के मोथाबाड़ी, सुजापुर और आसपास के इलाकों में मतदाता सूची से नाम कथित तौर पर हटाये जाने को लेकर हुए व्यापक हंगामे के एक दिन बाद सामने आया है।
खबरों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में लगे सात न्यायाधीशों को देर रात तक कालियाचक-II ब्लॉक कार्यालय के अंदर बंधक बनाकर रखा गया था।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल इस मामले को उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में लाये थे। इसके बाद आज मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ ने इस पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने के लिए राज्य प्रशासन को कड़ी फटकार लगायी।
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