चेन्नई , दिसंबर 08 -- अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव और विपक्ष के नेता ई. के. पलानीस्वामी ने नगर प्रशासन और जल आपूर्ति (एमएडब्ल्यूएस) विभाग के टेंडरों में 1,020 करोड़ रूपये के भ्रष्टाचार के मामले पर सोमवार को सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की निंदा की।
गौरतलब है कि यह निंदा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक को लिखे एक कथित पत्र के बाद की गई, जिसमें इस भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है।
श्री प्लानीस्वामी ने यहां एक बयान में कहा कि ईडी के पत्र के खुलासों ने उस संदेह की पुष्टि कर दी है जो तमिलनाडु के लोग लंबे समय से कर रहे थे कि द्रमुक सरकार पूरी तरह से 'कमीशन-कलेक्शन-करप्शन' के मॉडल पर चल रही है।
ईडी के पत्र के अनुसार, एमएडब्ल्यूएस विभाग में मंत्री के.एन. नेहरू के अधीन आने वाले ठेकों में एक संगठित कमीशन गिरोह के ज़रिये हेरफेर की गई। मंत्री के रिश्तेदारों द्वारा चलाया जाने वाला यह गिरोह ठेकेदारों से 7.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक वसूली करता था।
ईडी ने कथित तौर पर यह भी कहा है कि यह कदाचार शौचालय निर्माण से लेकर नाबार्ड-वित्तपोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं तक के व्यापक रूप से फैला हुआ है। कई स्तरों पर 20 प्रतिशत तक कमीशन लिया गया है।
ईडी ने इसे 'केवल हिमखंड का एक सिरा बताते हुए पूर्ण पैमाने पर जांच की मांग की है। इससे यह संकेत मिलता है कि भ्रष्टाचार की गहराई कहीं अधिक हो सकती है।
श्री प्लानीस्वामी ने कहा कि ये नए खुलासे तब सामने आए हैं, जब द्रमुक सरकार ईडी द्वारा पहले ही भेजे गए 888 करोड़ रूपये के 'कैश फॉर जॉब्स' घोटाले पर कार्रवाई करने में विफल रही है।
अन्नाद्रमुक नेता ने कहा, "मंत्री को बर्खास्त करने और निष्पक्ष जांच का आदेश देने के बजाय, द्रमुक सरकार भ्रष्टाचारियों को बचा रही है।" उन्होंने कहा कि यदि द्रमुक मंत्रियों और उनके गिरोह द्वारा लूटे गए भ्रष्ट धन की वसूली की जाती है, तो तमिलनाडु पूरी तरह से अपने दम पर कई बड़े लोक कल्याण और बुनियादी ढांचा पहल को धन मुहैया करा सकता है।
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