इटावा , अक्टूबर 30 -- दिल्ली समेत देश के अन्य महानगर वायु प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौती का सामना कर रहे हैं, ऐसे में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में 12 साल पहले अनूठी छात्र संसद में पारित एक प्रस्ताव आज भी पर्यावरण सुधार की दिशा में एक नजीर बना हुआ है।
दरअसल, पर्यावरण छात्र संसद का आयोजन सिर्फ इटावा में ही होता है। वर्ष 2014 से इसकी शुरुआत की गई है तब से यह अनवरत रूप से चल रहा है । यहां लोकप्रिय नुमाइश में प्रत्येक वर्ष पर्यावरण छात्र सम्मेलन का आयोजन किया जाता है जिसमें विभिन्न विद्यालयों की छात्र आते हैं और वे प्रस्ताव रखते हैं। इन्हीं प्रस्तावों के अनुरूप फिर पूरे साल काम किया जाता है । पर्यावरण संसद में ही सप्ताह में एक दिन पैदल चलने का प्रस्ताव पास किया गया था। इसके साथ ही प्रिय जनों के जन्मदिन पर पौधारोपण जैसे प्रस्ताव भी पारित किए जा चुके हैं।
वास्तव में छात्र संसद के एक दर्जन से अधिक ऐसे प्रस्ताव हैं जो कहीं ना कहीं सामाजिक तौर पर क्रियान्वित होकर पर्यावरण और इंसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। इनमे से एक प्रस्ताव में सरकारी अधिकारियों को सप्ताह में किसी एक दिन वाहन के बजाय पैदल ऑफिस तक जाना शामिल है जिसका अनुसरण जिलाधिकारी के निर्देश पर आज भी अधिकारी कर रहे हैं। इस दौरान जिले में कई जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान बदले मगर पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील इस प्रस्ताव को सभी अधिकारियों ने एक सुर में माना और अपने मातहतों को भी इसका अनुसरण करने की सलाह दी जिसका अक्षरश: पालन आज भी हो रहा है।
प्रस्ताव के अनुक्रम में बुधवार को जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ला के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारी पैदल ही अपने कार्यालय पहुंचे। इस कार्य में समाजसेवी भी शामिल रहे। डीएम आवास से अटल चौक होते हुए यह पैदल मार्च विकास भवन और कचहरी पहुंचा। इस पैदल मार्च के शुभारंभ पर पर्यावरण छात्र संसद के संयोजक कैलाश यादव , संजय सक्सेना व मानवेंद्र शर्मा ने जिलाधिकारी का बुके देकर स्वागत किया और छात्र संसद के प्रस्ताव की जानकारी दी। पैदल मार्च में काफी संख्या में अधिकारी शामिल हुए और अपने कार्यालय पहुंचे।
श्री शुक्ल ने बताया कि छात्र संसद की यह पहल शानदार है । इसमें शरीर न केवल स्वस्थ रहता है बल्कि ईंधन की भी बचत होती है और पर्यावरण संरक्षण का कार्य भी होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईंधन की बचत के लिए लोगों से आहवान किया है उस लिहाज से भी यह प्रक्रिया बेहतर है। पैदल मार्च में सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार, जिला विकास अधिकारी राकेश प्रसाद, जिला विद्यालय निरीक्षक अतुल कुमार सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी बनवारी सिंह, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी संजीव कुमार, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रदीप तिवारी, प्रधानाचार्य उमेश यादव के साथ जल संरक्षक निर्मल सिंह, विवेकानंद संस्थान के संयोजक डा. आशीष दीक्षित समाजसेवी शिक्षक राम जनम सिंह भी मौजूद रहे।
पर्यावरण छात्र संसद के संयोजक कैलाश यादव, संजय सक्सेना ने बताया कि इस संसद के प्रस्ताव के अनुरूप जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों ने पैदल मार्च किया है । इसका असर दूसरे अन्य लोगों पर भी पड़ेगा, लोगों से अपील है कि वह सप्ताह में एक दिन पैदल चलने की प्रक्रिया अपनाएं ।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित