कांकेर , मार्च 19 -- छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा नया माकड़ी में वृत्त स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र के निर्देश पर आयोजित की गई, जिसमें जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। जिला वन मंडल अधिकारी रौनक गोयल ने आज गुरुवार को बताया - कार्यक्रम में कलेक्टर निलेशकुमार महादेव भी शामिल हुए। उन्होंने बढ़ते वैश्विक तापमान पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले दो से तीन दशकों में तापमान में लगभग 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि दर्ज की गई है, जो भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग केवल सरकारों के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि इसके समाधान में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लाने की जरूरत है।
कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की। डीएफओ रौनक गोयल ने प्लास्टिक कचरे के उचित प्रबंधन और रिसाइकिलिंग पर जोर देते हुए कहा कि प्लास्टिक का अंधाधुंध उपयोग पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने किसानों से पराली न जलाने और इसके स्थान पर जैविक खाद तैयार करने जैसे विकल्प अपनाने की अपील की।
मुख्य वन संरक्षक राजेश चंदेले ने बस्तर संभाग में वनों के घटते क्षेत्र पर चिंता व्यक्त की और कहा कि वन केवल जैव विविधता के लिए ही नहीं, बल्कि जलवायु संतुलन बनाए रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने वनों के संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने पर बल दिया।
कार्यशाला में उपस्थित विशेषज्ञों ने सौर ऊर्जा के उपयोग, कचरा प्रबंधन, रिसाइकिलिंग और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने के उपायों की जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं, अधिकारियों और आम नागरिकों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना रहा।
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