वेल्लोर , जनवरी 03 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना अपने आप में ईश्वरीय सेवा का ही एक रूप है।
उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर में श्री शक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लेते हुए समारोह का हिस्सा बनने पर अपनी अत्यधिक खुशी व्यक्त की।
श्री राधाकृष्णन ने श्री शक्ति अम्मा की आध्यात्मिक यात्रा और समाज सेवा की सराहना करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सच्ची आध्यात्मिकता साथी मनुष्यों के प्रति प्रेम, करुणा और सेवा में निहित है और पर्यावरण की रक्षा करना अपने आप में ईश्वरीय सेवा का एक रूप है।
उपराष्ट्रपति ने धर्म के प्रति श्री शक्ति अम्मा की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन आध्यात्मिकता से परे व्यापक समाज सेवा तक फैला हुआ है। उन्होंने श्रीपुरम में चलाए जा रहे विभिन्न धर्मार्थ कार्यों की प्रशंसा की, जिनमें उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, जल-अभाव वाले क्षेत्रों में पीने के पानी की व्यवस्था, छात्रों को साइकिल वितरण जैसे लंबे समय से चल रहे कार्यक्रम के साथ-साथ हजारों लोगों को भोजन कराने वाला दैनिक 'अन्नदानम' कार्यक्रम शामिल है।
श्री राधाकृष्णन ने इन पहलों को भक्ति की सच्ची भावना से की गई नेक सेवा बताते हुए कहा कि श्रीपुरम परिसर के भीतर 50,000 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं और पास की कैलाशगिरि पहाड़ियों पर कई लाख पौधे लगाए गए हैं।उन्होंने इसे धरती माता और मानवता के लिए एक बड़ा योगदान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण पहल को एक मजबूत समर्थन बताया। उन्होंने दोहराया कि पर्यावरण की रक्षा करना ही ईश्वरीय सेवा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल कर्मकांडीय पूजा में नहीं बल्कि साथी मनुष्यों के प्रति प्रेम, करुणा और सेवा में निहित है। उन्होंने इस अवसर पर क्रांतिकारी तमिल कवि महाकवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों को भी उद्धृत किया, "प्रेम से बढ़कर कोई तपस्या नहीं है।"श्री राधाकृष्णन ने कहा कि समाज से प्रेम करना और उसकी सेवा करना आध्यात्मिक अनुशासन का सर्वोच्च रूप है। उपराष्ट्रपति ने श्री शक्ति अम्मा को वर्तमान युग का एक महान आध्यात्मिक प्रकाश स्तंभ बताया, जो अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से 'प्रेम ही ईश्वर है' के सिद्धांत का उदाहरण पेश करते हैं। समाज में धार्मिकता और आध्यात्मिक चेतना का पोषण करते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित