कौशांबी , जनवरी 09 -- कौशांबी की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को नई ऊंचाई देने की दिशा में कोसम इनाम गांव में निर्माणाधीन बुद्ध थीम पार्क को तेजी से विकसित किया जा रहा है, जहां भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन और करुणा संदेश को कलात्मक मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को बताया कि यह थीम पार्क करीब 11 हेक्टेयर क्षेत्र में 22.93 करोड़ रुपए की लागत से आकार ले रहा है, जिसे मौजूदा वर्ष के अंत तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है। यह पार्क देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों के लिए एक विशिष्ट आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल कौशांबी को वैश्विक बौद्ध पर्यटन सर्किट में सशक्त स्थान दिलाएगी, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।'कौशांबी में निर्माणाधीन बुद्ध थीम पार्क को तेलंगाना के नागार्जुन सागर स्थित 'बुद्धवनम' की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस थीम पार्क में ध्यान एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी अनेक सुविधाएं प्रस्तावित हैं। पार्क में विभिन्न 'मुद्राओं' जैसे- धर्मचक्र मुद्रा, अभय मुद्रा, भूमिस्पर्श मुद्रा आदि पर आधारित एक ध्यान केंद्र स्थापित किया जाएगा। परियोजना का प्रमुख आकर्षण 'बुद्धचरित वनम' होगा, जिसमें भगवान बुद्ध की जीवन यात्रा (जन्म से महापरिनिर्वाण तक) को मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा।

इसके अलावा, विकसित की जा रही जातक म्यूरल गैलरी, ध्यान वनम और स्तूप गैलरी जैसे विशिष्ट जोन आगंतुकों को भगवान बुद्ध के जीवन-दर्शन से आत्मिक रूप से जोड़ेंगे। विशेष रूप से स्तूप गैलरी में श्रीलंका, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, नेपाल, तिब्बत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान सहित विभिन्न देशों के 13 प्रतिष्ठित स्तूपों की प्रतिकृतियों के साथ-साथ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों का प्रतिनिधित्व किया जाएगा, जिससे यह परिसर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समग्र सांस्कृतिक-आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

उत्तर प्रदेश में भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों में कौशांबी महत्वपूर्ण है। तथागत ने यहां छठा और नौवां वर्षावास व्यतीत किया था। इन्हीं कालखंडों में बुद्ध ने कई उपदेश दिए, जिससे इस क्षेत्र में बौद्ध दर्शन का व्यापक प्रसार हुआ। समय के साथ कौशांबी आध्यात्मिक शिक्षा का एक सशक्त केंद्र बना। यह परंपरा आज भी जारी है।

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