नयी दिल्ली , अप्रैल 10 -- कांग्रेस ने महिला आरक्षण के प्रति अपने समर्थन को दोहराते हुए केंद्र सरकार की अपनाई जा रही परिसीमन की प्रक्रिया पर कड़े सवाल उठाए हैं। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी ने स्पष्ट किया कि विवाद आरक्षण को लेकर नहीं, बल्कि इसे लागू करने के तरीके, समयसीमा और संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या को लेकर है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद कहा कि असली विवाद महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन का तरीका और उसकी समयसीमा है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 334(ए) का हवाला देते हुए कहा कि इसके प्रावधानों को सही तरीके से लागू करने की आवश्यकता है। कांग्रेस का मानना है कि बिना जनगणना के आधार पर जल्दबाजी में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करना न तो व्यावहारिक है और न ही संवैधानिक। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने जनगणना और परिसीमन की शर्त रखकर इस आरक्षण को 2029 तक के लिए टाल दिया है, जबकि इसे 2024 के चुनावों से ही प्रभावी बनाया जा सकता था।
पार्टी ने महिला आरक्षण के कार्यान्वयन में हुई इस देरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश की महिलाओं से माफी मांगने की मांग की है। इसके अलावा, कांग्रेस ने 16 अप्रैल से प्रस्तावित संसद के विशेष सत्र के औचित्य पर भी प्रश्न खड़े किए हैं।
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