पटना , फरवरी 08 -- पत्रकार से राजनेता बने पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर की पुस्तक 'बिहार की चौथी दुनिया' का लोकार्पण रविवार को स्थानीय गांधी संग्रहालय में हुआ। अभियान संस्कृति मंच के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार की पत्रकारिता पर विमर्श में जाने माने पत्रकार अरविंद मोहन, संतोष सिंह, गुंजन सिन्हा, राजकुमार निवेदिता, पुरुषोत्तम,प्रबल महतो और अनीश अंकुर के साथ कई प्रमुख नाम शामिल हुए।

यह पुस्तक बिहार की पत्रकारिता पर गहरी दृष्टि डालती है। पुस्तक के लेखक श्री अनवर ने कहा कि क्षरण के बाद भी पत्रकारिता में जुझारू लोगों की कमी नही है। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार और राज्य सभा सांसद के रूप में राजनीति को करीब से देखाने का मौका मिला और पुस्तक उन्ही अनुभवों की तासीर है।

इस अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता पत्रकार अरविंद मोहन ने कहा कि बिहार की पत्रकारिता देश के दूसरे हिस्सों की पत्रकारिता से अलग है। यहां के पत्रकारों में नैतिकता का अंश बाकी हिस्सों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा दिखता है। उन्होंने कहा कि बिहार की पत्रकारिता पर लिखी गई यह पुस्तक कई ऐसे पहलुओं की चर्चा करती है जो महत्वपूर्ण है। उन्होनें कहा कि करोना काल मे बिहार की पत्रकारिता आपने अतीत की ख्याति के अनुरूप नही थी। इस बदलाव को भी समझने की जरूरत है।

'रुल्ड और मिसरुल्ड' और 'जेपी से बीजेपी' जैसी राजनीतिक पुस्तकों के लेखक पत्रकार संतोष सिंह ने कहा कि पत्रकार का काम सरकार को सिर्फ उन बातों को बताना नही है जिसे सरकार पहले से जानती है। उन्होंने कहा कि हमारा काम सरकार को उन बातों को भी बताना है जिससे सरकार अनभिज्ञ है।

पत्रकार, कवियित्री और समाजसेवी निवेदिता ने कहा कि पत्रकारिता आज भी लैंगिक, जाति और धर्म के पूर्वाग्रह से ग्रसित है। उन्होंने कहा कि जनसरोकार की खबरों को उंस अनुपात में जगह नही मिलती है, जिसकी वह हकदार हैं।

पत्रकार गुंजन सिन्हा ने कहा कि पत्रकारों की लड़ाई खुद से है। उन्होंने कहा कि इस उद्योग धंधे के माहौल में भी पत्रकार को अपनी लेखनी की जमीन तलाशनी होती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पत्रकार प्रबल महतो ने की। इस अवसर पर पटना विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष तरुण सहित कई पत्रकार और बुद्धिजीवी मौजूद थे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित