हरिद्वार , मई 01 -- उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर का शुक्रवार को समापन हो गया। समापन सत्र में आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर ठोस रणनीतियों पर चर्चा की गई।
शिविर के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनजातीय क्षेत्रों में योजनाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जाए। विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों ने जमीनी स्तर की चुनौतियों, संसाधनों के बेहतर उपयोग और नीति निर्माण में व्यापक सहभागिता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
समापन अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम, योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
इस चिंतन शिविर की थीम 'सहभाग, संवाद और समाधान' रही, जिसके माध्यम से नीति निर्माण में पारदर्शिता, संवाद और समाधान आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।
शिविर की शुरुआत योग और प्राणायाम सत्र के साथ हुई थी, जिसमें स्वामी रामदेव ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संतुलित और समग्र विकास के लिए परंपरा और आधुनिकता का सामंजस्य बेहद जरूरी है।
दो दिवसीय इस शिविर के समापन के साथ ही इसमें प्राप्त सुझावों को नीति और क्रियान्वयन स्तर पर लागू करने के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार किए जाने पर भी सहमति बनी।
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