जगदलपुर , नवंबर 16 -- छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा से लंबे समय तक प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र में पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'पंडुम कैफ़े' का उद्घाटन सोमवार को जगदलपुर के पूना मार्गम परिसर में किया जाएगा।

सरकार की समर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत स्थापित यह कैफ़े, हिंसा का मार्ग छोड़ चुके पूर्व माओवादी कैडरों और नक्सली हिंसा के पीड़ितों को सम्मानजनक आजीविका देने का एक अभिनव प्रयास माना जा रहा है।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने रविवार को बताया कि कैफ़े में कार्यरत युवा उन समुदायों से आते हैं, जिन्होंने वर्षों तक हिंसा का सामना किया है। उन्होंने कहा, "ये युवा अब शांति और विकास के मार्ग पर हैं। जिला प्रशासन और पुलिस की मदद से इन्हें कैफ़े प्रबंधन, ग्राहक सेवा, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में व्यापक प्रशिक्षण दिया गया है। यह कैफ़े केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्संरचना का प्रतीक है।"समर्पित कैडरों और हिंसा पीड़ितों के पुनर्वास कार्य को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में नई दिशा मिली है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल बस्तर में सकारात्मक बदलावों को और गति देगी।

बस्तर कलेक्टर हरीश एस ने निरीक्षण के दौरान रविवार को कहा, "पंडुम कैफ़े इस बात का उदाहरण है कि अवसर और विश्वास मिलने पर परिवर्तन न केवल संभव है, बल्कि स्थायी हो सकता है।"पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक शालभ सिन्हा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण कर सभी तैयारियों की समीक्षा की।

'पंडुम' नाम बस्तर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है, और इसका टैगलाइन यह संदेश देती है कि यहां परोसा जाने वाला हर कप साहस, परिवर्तन और नई शुरुआत की कहानी समेटे है।

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