गांधीनगर , जनवरी 09 -- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर का शुक्रवार को उद्घाटन किया।

श्री पटेल ने केंद्रीय खान मंत्रालय द्वारा महात्मा मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर में कहा कि यह चिंतन शिविर नये भारत के निर्माण का रोडमैप तैयार करने का एक सक्षम मंच बनेगा। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के खान मंत्री और पदाधिकारियों सहित हितधारक भाग ले रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि खान-खनिज देश के उद्योगों एवं अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। यह चिंतन शिविर सामूहिक चिंतन-मंथन के माध्यम से इस आधार स्तंभ को और मजबूत बनाकर देश के विकास को एक नयी गति देने का प्लेटफार्म प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर सेक्टर में सुधार लाये हैं। खनन क्षेत्र भी ऐसे सुधार का साक्षी रहा है। स्पष्ट नीतियों, राजनीतिक इच्छा शक्ति और पारदर्शी शासन के परिणामस्वरूप ये रिफॉर्म्स संभव हो पाये हैं।

श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर विकास करने की जो परंपरा स्थापित की है और ग्रीन माइनिंग, साइंटिफिक रेक्लेमेशन और टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी से खनन क्षेत्र का विकास किया है। उन्होंने गुजरात को लिग्नाइट, लाइमस्टोन और बॉक्साइट जैसे मुख्य खनिजों के लिए एक अहम स्थान बताते हुए कहा कि खान-खनिज क्षेत्र को केवल उत्पादकता और नीलामी तक सीमित न रखते हुए गुजरात ने इसे पारदर्शिता, अनुशासन और नियम-कानूनों के अमल का प्रतीक भी बनाया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने खान से लेकर अंतिम गंतव्य स्थल तक के खनिज परिवहन की रीयल टाइम निगरानी के लिए जीपीएस व्हीकल ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि गुजरात अपनी खनिज संपदाओं के माध्यम से प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' से 'विकसित भारतएट2047' के संकल्प को साकार करने को प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने खनन क्षेत्र को भारत के आर्थिक विकास और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने का एक मजबूत आधार स्तंभ करार दिया और पिछले 11 वर्षों में खनन क्षेत्र में आए बदलावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2014 की तुलना में मिनरल एक्सप्लोरेशन यानी खनिज अन्वेषण में 190 फीसदी की वृद्धि हुई है। आयरन, लाइमस्टोन, लेड और जिंक जैसे खनिजों के उत्पादन में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है। पारदर्शी नीलामी प्रणाली और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमडब्ल्यू) के माध्यम से राज्यों के खनन राजस्व में बड़ा उछाल आया है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि 'विकसित भारतएट2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने में खनिज क्षेत्र और जल प्रबंधन का परस्पर समन्वय बहुत ही आवश्यक है। टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए आवश्यक कच्चे माल की पूर्ति में इस मंत्रालय की भूमिका निर्णायक है।

उन्होंने कहा कि खनिज उत्खनन के दौरान पर्यावरण और जल संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने 'माइनिंग विद माइंडफुलनेस' का मंत्र देते हुए कहा कि पर्यावरण संतुलन के साथ खनन कार्य करने से ही दीर्घकालिक लाभ होगा। खनन प्रक्रिया में पानी का रीसाइकल और रीयूज अनिवार्य है। उन्होंने आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस प्रकार से उपयोग करने की बात कही जिससे भूमिगत जलस्तर को नुकसान न पहुंचे।

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने चिंतन शिविर को भारत के खनन क्षेत्र के भविष्य के लिए एक निर्णायक मार्ग बताया और कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के लिए वर्ष 2026 अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऊर्जा संग्रह के लिए आवश्यक बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले 'क्रिटिकल मिनरल्स' के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ऐसी खानों की नीलामी और उत्पादन प्रक्रिया को तेज बना रही है। आज के टेक्नोलॉजी के युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक उपकरणों का खनन क्षेत्र में उपयोग अनिवार्य है, जिससे न केवल प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि प्रदूषण, लागतऔर समय में भी उल्लेखनीय बचत होगी।

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