गांधीनगर , जनवरी 23 -- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल शुक्रवार को विक्रम संवत 1882 की वसंत पंचमी के दिन वडताल की पवित्र भूमि पर भगवान स्वामीनारायण द्वारा रचित शिक्षापत्री के 200 वर्ष पूर्ण होने के समैया के उत्सव अवसर पर गांधीनगर जिले के अडालज में शामिल हुए।
समैया महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वीडियो संदेश का प्रसारण कर सभी हरि भक्तों को शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर श्री पटेल ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को विकसित गुजरात के माध्यम से गति प्रदान करने में सफलता मिले, प्रार्थना भगवान स्वामीनारायण से की।
श्री पटेल ने इस समैया महोत्सव में सहभागी होकर शिक्षापत्री और भगवान स्वामीनारायण के दर्शन एवं अर्चना कर धन्यता का अनुभव किया और कहा कि वसंत पंचमी अर्थात ज्ञान, साधना, शिक्षण की आराध्य देवी माता सरस्वती की वंदना का दिन है और जोड़ा कि भगवान स्वामीनारायण ने भी समाज को 'शिक्षापत्री' के माध्यम से अनुशासन, संयम, सदाचार और समरसता की ओर ले जाने वाली विचारधारा का शिक्षण देने का युगांतकारी कार्य किया है।
श्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि शिक्षापत्री ने धर्म को केवल उपासना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे व्यावहारिक जीवन में समरसता, एकता और बंधुता से भी जोड़ा है। विश्वनेता और यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' का जो मंत्र दिया है, उसे शिक्षापत्री समैया उत्सव साकार करता है।
उन्होंने कहा कि मुझे इस उत्सव में सहभागी होकर संतों के आशीर्वाद तथा आप सभी हरि भक्तों के दर्शन का सौभाग्य मिला है, इसके लिए मैं स्वयं को भाग्यशाली मानता हूँ, उन्होंने आगे कहा कि आध्यात्मिक ग्रंथ, पुराण, कथाएं और संतों के वचनामृत, धर्म परंपरा हमारी भव्य विरासत हैं।
शिक्षापत्री के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह समैया महायज्ञ, वेदपाठ के पठन और अखंड धुन से इस आध्यात्मिक विरासत को व्यापक बनाने का अर्थपूर्ण माध्यम है। साथ ही साथ प्रधानमंत्री श्री मोदी साहब द्वारा दिए गए 'विरासत भी, विकास भी' के लक्ष्य को साकार करने वाला यह प्रसंग भी है। इस उत्सव में ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और एआई का उपयोग कर लोग शिक्षापत्री के संदेशों को देख एवं समझ सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने समैया के ऑडिटोरियम के लिए सोलर एनर्जी का उपयोग तथा इस स्थल पर प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग कर समैया को गो ग्रीन इको सिस्टम के अनुरूप बनाए जाने के लिए आयोजकों को बधाई दी और कहा कि आज का समय तेज विकास, टेक्नॉलोजी और भौतिक सुविधाओं का युग है, लेकिन एक बात सभी को स्वीकार करनी होगी कि आंतरिक अनुशासन, इनर पीस और नैतिक आधार के बिना विकास टिक नहीं सकता। स्वामीनारायण भगवान द्वारा रचित शिक्षापत्री हमें आध्यात्मिक मूल्यों को व्यावहारिक जीवन में उतारकर संतुलन बनाए रखने का राजमार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि अहिंसा, सत्य, व्यसन मुक्ति, सामाजिक समरसता और जिम्मेदार नागरिकता; ये सभी मूल्य शिक्षापत्री के 200 वर्ष बाद भी आज उतने ही प्रासंगिक हैं।
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