पटना , नवंबर 01 -- वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय (के.बी.सहाय) को पराजित कर महामाया प्रसाद सिन्हा मुख्यमंत्री बने थे।

02 अक्टूबर 1963 गांधी जयंती के दिन के.बी.सहाय बिहार के चौथे मुख्यमंत्री बने थे। फरवरी 1967 में बिहार विधानसभा चुनाव कराये गये। इस चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री के.बी.सहाय ने पटना पश्चिम और हजारीबाग (अब झारखंड) का हिस्सा) से चुनाव लड़ा और दोनों ही जगह उन्हें हार का सामना करना पड़ा। श्री महामाया प्रसाद भाषण देने में निपुण थे। जनसभाओं में वह युवा वर्ग को 'मेरे जिगर के टुकड़ों' कह कर संबोधित करते थे। छात्र उनके दीवाने थे।पटना पश्विम सीट से राजा कामाख्या नारायण सिंह की पार्टी जन क्राति दल के टिकट पर महामाया प्रसाद सिन्हा ने कांग्रेस प्रत्याशी और तत्कालीन मुख्यमंत्री के.बे.सहाय को पराजित कर दिया और मुख्यमंत्री बने। इससे पूर्व श्री के.बी.सहाय वर्ष 1962 के विधानसभा चुनाव में पटना पश्चिम सीट से ही विधायक चुने गये थे। कुछ ऐसा ही नजारा वर्ष 2013 में नयी दिल्ली के विधानसभा चुनाव में हुआ था जब आम आदमी पार्टी (आप) के संस्थापक अरविंद केजरीवाल ने नयी दिल्ली विधानसभा सीट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को पराजित किया और पहली बार दिल्ली के मुख्ममंत्री बने।

वर्ष 1967 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 128 सीटें मिली थी, जो सरकार बनाने के लिये बहुमत से कम थी। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी 68 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। उसके नेता कर्पूरी ठाकुर की मुख्यमंत्री के पद पर दावेदारी बनती थी, लेकिन अन्य पार्टियां तैयार नहीं हुयी। ऐसे में जन क्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा के नाम पर सभी दल सहमत हो गये। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनसंघ, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), जन क्रांति दल और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को मिलाकर पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनायी गयी। इसे संविद सरकार यानी संयुक्त विधायक दल की सरकार कहा गया। महामाया प्रसाद 05 मार्च 1967 को बिहार के पांचवे मुख्यमंत्री बने, जबकि जननायक कर्पूरी ठाकुर उप मुख्यमंत्री बनें। श्री महामाया प्रसाद इसके बाद वर्ष 1969 में सीवान के महाराजगंज और वर्ष 1972 में गोरियाकोठी के विधायक जबकि वर्ष 1977 में पटना के सांसद बनें।

पटना पश्चिम विधानसभा सीट से वर्ष 1977 में श्री ठाकुर प्रसाद (वर्तमान में पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद के पिता ने चुनाव जीता। इसके बाद इस सीट पर 1995,2000,2005 फरवरी और अक्टूबर 2005 में नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने चुनाव जीता। श्री सिन्हा के निधन के बाद उनके पुत्र नितीन नवीन (वर्तमान में बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री) ने वर्ष 2006 उपचुनाव जीता। परिसीमन के बाद पटना पश्चिम सीट विलोपित हो गई और बांकीपुर विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। इस सीट पर नितीन नवीन ने लगातार तीन बार 2010, 2015 और 2020 में चुनाव जीता और विधायक बने। श्री नवीन इस बार सियासी पिच पर चुनावी 'चौका' जड़ने के प्रयास में हैं।बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रथम चरण में 06 नवंबर को मतदान होगा।

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