पुणे , मार्च 23 -- पंडित जितेंद्र अभिषेकी संगीत महोत्सव का 20वां संस्करण लय, सुर और शास्त्रीय कला के मंत्रमुग्ध कर देने वाले संगम के साथ संपन्न हुआ।

समापन समारोह में कथक नृत्य, मधुर संतूर वादन और समृद्ध शास्त्रीय गायन का अनूठा मेल देखने को मिला, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। तरंगिणी सांस्कृतिक ट्रस्ट और 'आपला परिसर' ने कोथरुड के यशवंतराव चव्हाण नाट्यगृह में इसका आयोजन किया, जिसके अंतिम सत्र में कथक नृत्यांगना नयनिका घोष, संतूर उस्ताद पंडित सतीश व्यास और प्रसिद्ध गायिका श्रुति सडोलीकर-काटकर जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।

सुश्री नयनिका घोष के गरिमापूर्ण कथक प्रदर्शन से शाम की शुरुआत हुई, जिन्होंने राग धमार पर आधारित रचनाओं से श्रोताओं को सम्मोहित कर लिया। उनकी ठुमरी "आज खेलो श्याम रंग होली" की भावपूर्ण प्रस्तुति ने भगवान कृष्ण के माध्यम से होली के उत्सव के उल्लास को खूबसूरती से दर्शाया। उनके साथ कार्तिक स्वामी (तबला), आशीष गंगावणे (पखावज), यशवंत थिटे (हारमोनियम) और अर्पिता वैशंपायन (गायन) ने संगत की। इस अवसर पर वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्तित्व और संस्कृति प्रेमी अंकुश काकड़े ने उन्हें सम्मानित किया।

इसके बाद पद्मश्री से सम्मानित पंडित सतीश व्यास ने मनमोहक संतूर वादन प्रस्तुत किया, जिनके राग धनकोरी कल्याण के वादन ने एक गहरा संगीतमय वातावरण निर्मित किया। रोहित मजुमदार ने तबले पर उनका कुशल साथ दिया। उन्हें महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने सम्मानित किया।

महोत्सव का समापन सुश्री श्रुति सडोलीकर-काटकर के ओजपूर्ण गायन के साथ हुआ, जिनके साथ हारमोनियम पर सुधीर नायक और तबले पर भरत कामत ने संगत की, जिससे यह कार्यक्रम एक यादगार मोड़ पर समाप्त हुआ।

इस अवसर पर वरिष्ठ हारमोनियम वादक प्रमोद मराठे को सुश्री श्रुति सडोलीकर-काटकर के हाथों 'पंडित मंगेश मुले संगतकार पुरस्कार' से नवाजा गया।

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