चंडीगढ़ , फरवरी 27 -- पंजाब सरकार ने अपने उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्रों में अत्याधुनिक 'कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी' को पूरी तरह से मुफ्त कर दिया है। यह चिकित्सा प्रक्रिया कभी बेहद महंगी होने के कारण केवल विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग तक सीमित थी, वह अब पंजाब के हर बच्चे का गारंटीकृत अधिकार है। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने शुक्रवार को कहा कि अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सफल सर्जरी के बाद, सरकार ने बचपन के बहरेपन को व्यवस्थित रूप से समाप्त करने के लिए एक मजबूत चार-स्तरीय सर्जिकल ढांचा स्थापित किया है। कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी अब सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, अमृतसर, पटियाला, फरीदकोट और डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज मोहाली में पूरी तरह चालू है।

कॉक्लियर इम्प्लांट आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में सबसे महंगी प्रक्रियाओं में से एक है। निजी क्षेत्र में इस सर्जरी की लागत आमतौर पर प्रति कान छह लाख से 10 लाख रुपये के बीच होती है। सरकार ने इस वित्तीय बाधा को पूरी तरह से हटा दिया है। इस पहल के तहत इम्प्लांट डिवाइस, सर्जरी, अस्पताल में भर्ती और ऑपरेशन के बाद का पुनर्वास पूरी तरह से मुफ्त प्रदान किया जा रहा है।

भारत में लगभग 6.3 प्रतिशत जनसंख्या सुनने की गंभीर समस्या से जूझ रही है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर एक हजार नवजात शिशुओं में से लगभग पांच बच्चे जन्मजात बहरेपन के साथ पैदा होते हैं। पंजाब सरकार ने कॉक्लियर इम्प्लांट सेवाओं को संस्थागत बनाकर इस 'खामोश महामारी' का सीधे मुकाबला किया है।

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