चंडीगढ़ , जनवरी 05 -- केंद्र सरकार के पूर्व सचिव ई.ए.एस. सरमा ने सोमवार को पंजाब सरकार द्वारा पंजाब स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिलिटेड (पीएसपीसीएल) की ज़मीन बेचने के प्रस्ताव के संबंध में पंजाब के मुख्य सचिव के. ए. प्रसाद सिन्हा को पत्र लिखा।

श्री सरमा ने लिखा है कि पीएसपीसीएल की ज़मीन बेचने का पंजाब सरकार का यह फैसला बहुत ही नासमझी भरा है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएसपीसीएल की ज़्यादातर ज़मीनें मूल रूप से भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत इस आधार पर अधिग्रहित की गयी थीं कि उन ज़मीनों की ज़रूरत 'सार्वजनिक उद्देश्य' के लिए थी, यानी राज्य के स्वामित्व या नियंत्रण वाले निगम के लिए ज़मीन उपलब्ध करायी गयी थीं। दूसरे शब्दों में, उस समय संबंधित ज़मीनों को इस आधार पर अधिग्रहित किया गया था कि उनकी ज़रूरत पूरी तरह से सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण वाले निगम के लिए थी। अगर पंजाब सरकार अब उन ज़मीनों को निजी एजेंसियों को बेचती है, तो यह उस वैधानिक आवश्यकता का घोर उल्लंघन होगा, जो अप्रत्यक्ष रूप से सार्वजनिक विश्वास का उल्लंघन भी है। इसके अलावा, पीएसपीसीएल की ज़मीनों को निजी पार्टियों को बेचना गलत सलाह है, क्योंकि इसका मतलब होगा उन ज़मीनों को रियल एस्टेट एजेंटों के हाथों में देना जो राज्य की कीमत पर मुनाफा कमाएंगे। पीएसपीसीएल को भविष्य में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने के लिए खुद उन ज़मीनों की ज़रूरत होगी।

उन्होंने लिखा है, " मुझे ऐसा लगता है कि पंजाब सरकार ने ज़मीन के मुद्रीकरण का यह बेकार और नुकसानदायक काम शुरू किया है, जो केंद्र सरकार द्वारा अपनायी गयी समग्र भूमि मुद्रीकरण नीति की नकल करने की कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार खुद, चुनाव के लिए फंड देने वाले कॉर्पोरेट्स के भारी दबाव में है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप शासित पंजाब को केंद्र सरकार के दबाव के आगे झुकना पड़ा और राज्य में कॉर्पोरेट के दबाव के आगे झुकना पड़ा।उन्होंने पंजाब सरकार से पीएसपीसीएल की संपत्तियों के मुद्रीकरण के फैसले को वापस लेने और इसे कमज़ोर करने वाला कोई भी काम न करने काअनुरोध किया है।

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