बठिंडा , जनवरी 02 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने कहा है कि पंजाब में आप सरकार पिछले तीन सालों में मौजूदा मनरेगा कानून के तहत मजदूरों को 100 दिन का रोजगार देने में पूरी तरह से नाकाम रही है, लेकिन मुख्यमंत्री इस गंभीर नाकामी पर पूरी तरह से चुप हैं।

यहां पार्टी कार्यालय में शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए श्री कैंथ ने कहा कि विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) अधिनियम, 2025 के तहत, ग्रामीण मजदूरों को अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार मिलेगा, और अगर समय पर काम नहीं मिलता है, तो बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान पहले जैसा ही रहेगा। उन्होंने बताया कि मनरेगा कानून के अनुसार, राज्य सरकार के लिए मजदूर के काम मांगने के 15 दिनों के भीतर काम देना अनिवार्य है। अगर काम नहीं दिया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ता देना होता है, लेकिन पंजाब सरकार न तो समय पर काम देती है और न ही बेरोजगारी भत्ता देती है। मनरेगा की धारा 25 के तहत, ऐसी स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। भाजपा नेता श्री कैंथ ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब की 62.5 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को धोखा दे रहे हैं, जिसमें 13,304 ग्राम पंचायतें हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत धन के दुरुपयोग और गबन से जुड़े विभिन्न घोटालों से संबंधित पंजाब में कथित अनियमितताओं की उच्च-स्तरीय जांच का आदेश नहीं दिया है। धोखाधड़ी के तरीकों में फर्जी जॉब कार्ड बनाना, फर्जी भुगतान रसीदें तैयार करना, ऐसा काम दिखाना, जो कभी पूरा नहीं हुआ (जैसे सड़क निर्माण या सामग्री की आपूर्ति), और अयोग्य या मृत लोगों को लाभार्थी के रूप में सूचीबद्ध करना शामिल है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के मजदूरों से जुड़े मामलों में अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत कार्रवाई अनिवार्य है, लेकिन मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि ऐसे कितने मामलों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा में हो रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को छिपाने के लिए अनिवार्य सोशल ऑडिट भी नहीं करवा रही है। उन्होंने कहा कि 2024-25 में 6,095 ग्राम पंचायतों में और 2025-26 में 7,389 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत अनिवार्य सोशल ऑडिट नहीं किये गये, जिसे उन्होंने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने अभी तक स्पेशल ऑडिट यूनिट द्वारा पकड़े गये भ्रष्टाचार के 3,986 मामलों पर कोई कार्रवाई रिपोर्ट जारी नहीं की है, जो साफ दिखाता है कि भ्रष्टाचारियों को बचाया जा रहा है।

श्री कैंथ ने कहा कि श्री मान पिछले तीन सालों में मनरेगा में हुई अनियमितताओं पर श्वेत पत्र जारी करने में हिचकिचा रहे हैं। इसके अलावा, लोकपाल द्वारा जांच के बाद जारी किये गये 2.35 करोड़ रुपये के रिकवरी आदेशों को भी अब तक लागू नहीं किया गया है, जो सरकार की मंशा और कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा केंद्र सरकार की ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर स्टैंडिंग कमेटी (2024-2025) की रिपोर्ट के आंकड़ों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

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