नयी दिल्ली , अक्तूबर 21 -- दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार जानबूझकर दिल्ली की हवा को प्रदूषित करने की साजिश रच रही है।
श्री सिरसा ने आज यहां एक संवाददाता में कहा कि पिछले चार दिनों में पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ अचानक बढ़ गयी हैं और यह कोई संयोग नहीं है। पंजाब के किसानों को पराली जलाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह दिल्ली की हवा को प्रदूषित करने की सुनियोजित राजनीति है ताकि कहा जा सके कि दिल्ली सरकार असफल साबित हुयी है।
उन्होंने कहा, "अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम दीपावली जैसे पावन पर्व को राजनीति से जोड़ रहे हैं। दीपावली किसी राजनीतिक पार्टी का त्योहार नहीं है, यह भारत की आत्मा का त्योहार है। जो लोग इसे पाप बता रहे हैं, वे धर्म और समाज दोनों के साथ अन्याय कर रहे हैं।"श्री सिरसा ने कहा कि आम आदमी पार्टी धर्म के नाम पर समाज को बाँटने की कोशिश कर रही है। "पहले पटाखों पर प्रतिबंध लगाकर एक वर्ग को खुश किया गया, अब दीपावली मनाने वालों को 'पापी' कहा जा रहा है, यह वही लोग हैं जो विधानसभा में भगवान श्रीराम के विरोध में आवाज उठाते थे।"श्री सिरसा ने बताया कि दीपावली के बाद भी दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रहा। यह साबित करता है कि पटाखे प्रदूषण का प्रमुख कारण नहीं हैं। हमने कानून का पालन करते हुए दीपावली मनायी और हवा की गुणवत्ता नियंत्रण में रखी।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण घटाने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। अब तक 27 लाख टन कूड़ा हटाया जा चुका है और हमारा लक्ष्य 28 लाख टन का है। सभी 500 वर्गमीटर से बड़ी इमारतों की निर्माण गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसें चल रही हैं, जिससे प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आयी है। छह हजार से अधिक उद्योगों को "कंसेंट टू आपरेट" और "कंसेंट टू इस्टेबलिस्ड" प्रमाणपत्र दिए गए हैं। इन उद्योगों का उत्सर्जन अब "शून्य प्रदूषण" श्रेणी में लाया गया है। वाहन प्रदूषण नियंत्रण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल किया गया है।
उन्होंने कहा कि 27 वर्षाें की बीमारियों को सात महीनों में खत्म नहीं किया जा सकता है लेकिन हमने सच्चे इरादे से शुरुआत कर दी है। अब जनता को हवा में फर्क दिखने लगा है। दिल्ली में अब तक 21 प्रतिशत नयी कंस्ट्रक्शन गतिविधियाँ बढ़ी हैं और अच्छी बात यह है कि प्रदूषण स्तर में गिरावट दर्ज की गयी है। इसके साथ ही दिल्ली में पुराने वाहनों पर बेवजह लगायी गयी पाबंदी को भी हटाया गया। इससे साबित होता है कि जब नीति और नीयत दोनों साफ हों, तो विकास और पर्यावरण दोनों साथ चल सकते हैं।
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