चंडीगढ़ , नवंबर 03 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने बुधवार को पंजाब की भगवंत मान सरकार पर राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) के दुरुपयोग और पैसों की हेरफेर करने का गंभीर आरोप लगाया।
श्री चुघ ने कहा कि यह मामला इतना बड़ा है कि इसकी केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच तुरंत होनी चाहिए, क्योंकि मान सरकार ने लगातार झूठ बोलकर तीन करोड़ पंजाबियों को गुमराह कर केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का षड्यंत्र रचा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंजाब में बाढ़ प्रभावित परिवारों की हर संभव मदद की, वहीं आप सरकार झूठा और राष्ट्र विरोधी नैरेटिव चलाकर केंद्र द्वारा भेजी गयी राहत राशि को दबाती और तोड़-मरोड़कर पेश करती रही। उन्होंने संसद में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री द्वारा दिये बयान का हवाला दिया, जिसमें बताया गया था कि एक अप्रैल 2025 को पंजाब सरकार के पास एसडीआरएफ में 11,947 करोड़ रुपये का ओपनिंग बैलेंस था। उन्होंने कहा कि इससे साफ होता है कि मान सरकार ने इस राशि का दुरुपयोग और जनता से जानकारी छिपाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता को बताया जाये कि यह पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पंजाब की बाढ़ 'मान मेड डिजास्टर' थी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पंजाब के किसानों और बाढ़ प्रभावित परिवारों की हर संभव मदद की। पीएम-किसान की 21वीं किस्त के तहत 11.09 लाख से अधिक किसानों को 221 करोड़ रुपये सीधे भेजे गये। पीएम-आरकेविवाई के तहत 74 करोड़ रुपये के गेहूं के बीज मुफ्त वितरित किये गये। केंद्र और राज्य ने मिलकर बरसीम बीज वितरण के लिए 12.50 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की। साथ ही सरसों के बीज, बागवानी पुनर्स्थापन और कृषि सहायता के अन्य कार्यक्रमों के लिए भी अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराये गये।
श्री चुघ ने कहा कि मान सरकार ने एसडीआरएफ में पड़े भारी फंड का सही उपयोग करने के बजाय इसे छिपाने और केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाने में अधिक रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि जब राहत की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब धन खर्च नहीं हुआ। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की और कहा कि धन की बंदरबांट के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब की वित्तीय हालत इतनी खराब हो चुकी है कि न विकास हो रहा है और न ही महीनों से कर्मचारियों को वेतन मिल पा रहा है।
हालिया मीडिया रिपोर्टों का जिक्र करते हुए श्री चुघ ने बताया कि पंजाब में पूंजीगत खर्च लगातार गिरता जा रहा है और स्थिति लगभग आर्थिक आपातकाल जैसी हो चुकी है। 2025-26 की पहली छमाही में पूंजीगत व्यय 36 प्रतिशत गिरकर सिर्फ 1,760 करोड़ रुपये रह गया और सरकार अपनी ही बजट प्रावधान का सिर्फ 17 प्रतिशत ही खर्च कर पायी।
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