चंडीगढ़ , नवंबर 10 -- चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर विद्यार्थी सोमवार को प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां 91 सीनेट चुने जाने हैं।

इस दौरान विद्यार्थी और पुलिस के बीच बहस भी हो गयी। पुलिस के इंतजाम देखकर विद्यार्थियों ने समर्थकों से अपील की कि पुलिस उन्हें जहां रोकें, वहीं बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दें। पुलिस ने एक नंबर द्वार को बंद कर दिया है और दो तथा तीन नंबर के द्वार से भी कड़ी जांच के बाद ही जाने दिया जा रहा है। पुलिस द्वारा दो नंबर द्वार से कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की सूचना के बाद विद्यार्थी भड़क उठे। वह द्वार खोलकर यूनिवर्सिटी में घुस गये हैं। इस दौरान पुलिस और विद्यार्थियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। रविवार रात भी इसको लेकर विद्यार्थियों ने हंगामा किया। देर रात तक छात्र यूनिवर्सिटी के गेट पर धरने पर बैठे रहे। मामला बढ़ता देख वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कंवरपाल कौर को खुद ही स्थिति संभालनी पड़ी थी।

विद्यार्थियों के प्रदर्शन को देखते हुए यूनिवर्सिटी में सोमवार और मंगलवार को अवकाश घोषित कर दिया गया है। सुबह से ही यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों भीड़ जुटनी शुरू हो गयी है। विद्यार्थियों के आह्वान पर उनके समर्थन में किसान और कई राजनीतिक दल भी प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने हालांकि सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए दो हजार कर्मचारी तैनात किये हैं। पूरे शहर में 12 जगह नाकाबंदी की गयी है। यूनिवर्सिटी में सिर्फ उन्हीं को जाने की इजाजत है, जिनका कोई काम है। उसके लिए भी उनके पहचान पत्र देखे जा रहे हैं। यह विवाद पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट और सिंडिकेट भंग करने से शुरू हुआ। इससे विद्यार्थी भड़क उठे, तो केंद्र सरकार ने यह अधिसूचना वापस ले ली थी।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने घटना की निंदा करते हुए कहा, " पंजाब विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अपने ही परिसर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है। सुरक्षाकर्मियों द्वारा लड़कियों को धक्का दिया जा रहा है और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। "राजा वडिंग ने कहा, " उनके पास वैध पहचान पत्र हैं - क्या यह लोकतंत्र है या छिपी हुई तानाशाही है? पंजाब विश्वविद्यालय में आज शांतिपूर्ण छात्रों पर पुलिस की बर्बरता की निंदा करने के लिए शब्द कम हैं। छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, क्योंकि उनका केंद्र सरकार पर से भरोसा उठ गया है जो पंजाब से विश्वविद्यालय छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पंजाब के युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।"प्रदर्शन की वजह से चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से अपने सारे बॉर्डर पर स्पेशल नाके लगाये गये हैं वाहनों की निगरानी की जा रही है, इस वजह से जीरकपुर राजमार्ग पर जाम की स्थिति बन गयी है। लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। ऐसी स्थिति मोहाली और मुल्लापुर में भी है।

उल्लेखनीय है कि 28 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने 59 साल पुरानी सीनेट और सिंडिकेट को भंग करने का अधिसूचना जारी किया था। इस पर तुरंत राजनीतिक प्रतिक्रिया आयी। पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल चीमा समेत, शिअद अध्यक्ष सखबीर सिंह बादल और कांग्रेस महासचिव प्रगट सिंह ने इसे पंजाब और पंजाबियत को खत्म करने के प्रयास जैसा बताया था। सभी ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के इस अधिसूचना को रद्द करने के लिए हर तरह का संघर्ष करने का एलान किया। कहना था कि केंद्र सरकार की तरफ से सीनेट सदस्यों की संख्या ही कम नहीं की है, बल्कि इनकी शक्तियां भी कम कर दी हैं। विद्यार्थी भी इस में शामिल हो गये थे। उन्होंने ने भी आमरण अनशन शुरू कर दिया था। यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा बनाया गया था।

विरोध बढ़ने पर केंद्र सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट और सिंडिकेट भंग करने के फैसले को वापस लेते हुए नयी अधिसूचना जारी की है। इसमें सरकार ने अपने फैसले को रद्द नहीं, बल्कि स्थगित किया था। स्टूडेंट यूनियन का कहना है कि पंजाब विश्वविद्यालय के संबंध में भारत सरकार ने अपनी हालिया अधिसूचनाओं से सबको गुमराह करने की कोशिश की है। इसे लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने तो इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय तक जाने की बात कह दी थी।

केंद्र सरकार की ओर से फैसला वापस लेने के बावजूद छात्रों का विरोध जारी है। विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक सीनेट के सभी 91 सदस्यों की तारीख का ऐलान नहीं होगा, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। इसमें विपक्ष के नेताओं के अलावा सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का भी समर्थन मिल रहा है।

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