जालंधर , फरवरी 21 -- पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं भोलथ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत पंजाब को जारी किये गये धन के उपयोग की तुरंत जांच करवायी जाये।
श्री खैरा ने शनिवार को केन्द्रीय मंत्री को पत्र लिख कर कहा कि 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, पंजाब में ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के माध्यम से जमीनी स्तर पर शासन को मजबूत करने और आवश्यक नागरिक अवसंरचना में सुधार के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की गयी है। इन निधियों को सीधे पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित किया जाना चाहिए और राजकोषीय विकेंद्रीकरण और स्थानीय विकास को बढ़ावा देनेके उद्देश्य से निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार ही इनका उपयोग किया जाना चाहिए।
श्री खैरा ने कहा, " मुझे हालांकि जमीनी सूत्रों से विश्वसनीय जानकारी मिली है, जिससे पता चलता है कि इन निधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, जो कथित तौर पर लगभग 750 करोड़ रुपये है, राज्य सरकार द्वारा विभागीय देनदारियों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिसमें जल आपूर्ति और संबद्ध सेवाओं से संबंधित परिचालन व्यय शामिल हैं, बजाय इसके कि इसे पंचायती राज संस्थाओं को अनुमोदित स्थानीय विकास कार्यों के लिए दिया जाये। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार का मार्ग परिवर्तन हुआ है, तो 15वें वित्त आयोग की शर्तों और परिचालन दिशानिर्देशों का उल्लंघन, स्थानीय निकायों के वित्तीय सशक्तिकरण से संबंधित 73वें संवैधानिक संशोधन की भावना को कमजोर करना, ग्रामीण स्थानीय संस्थानों को उनके उचित वित्तीय संसाधनों से वंचितकरना और व्यय का गलत वर्गीकरण या अनुचित रिपोर्टिंग की संभावना जैसी गंभीर चिंताएं उत्पन्न होंगी।
श्री खैरा ने कहा कि यह भी चिंता का विषय है कि वित्त आयोग के अनुदानों का निर्धारित ढांचे से बाहर किसी भी प्रकार का उपयोग पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सेवा वितरण के इच्छित परिणामों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब को जारी किये गये 15वें वित्त आयोग के अनुदानों के उपयोग की विस्तृत लेखापरीक्षा/ जांच का आदेश दिया जाये। राज्य सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त करें जिसमें स्तरवार और पंचायतवार निधि का हस्तांतरण, घटक-वार व्यय विवरण, धनराशि का कोई हिस्सा विभागीय खातों या देनदारियों में स्थानांतरित में बताया गया है। इन अनुदानों के वितरण, उपयोग और रिपोर्टिंग के संबंध में निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुपालन की जांच करवायी जाये।
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