चंडीगढ़ , दिसम्बर 02 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने मंगलवार को पंजाब सरकार के लगातार घटते पूंजीगत व्यय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि श्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब एक गंभीर आर्थिक अव्यवस्था और आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति में पहुंच चुका है।

श्री चुघ ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में पंजाब का कैपिटल एक्सपेंडिचर 36 प्रतिशत गिरकर केवल 1,760 करोड़ रुपये रह जाना और बजट प्रावधान का महज 17 प्रतिशत खर्च होना यह दिखाता है कि सरकार काम करने में पूरी तरह नाकाम है और विकास की जिम्मेदारियों को छोड़कर केवल राजनीतिक दिखावे और दिल्ली की तिहाड़ गैंग तिकड़ी की सेवा में लगी हुई है।

उन्होंने कहा कि आप सरकार के शासनकाल में कैपिटल एक्सपेंडिचर में यह निरंतर गिरावट राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अधूरी सड़कें, रुके हुए प्रोजेक्ट, घटते रोजगार और बदहाल बुनियादी ढांचा इस बात के प्रमाण हैं कि भगवंत मान सरकार गहरी नींद में है। कैपिटल एक्सपेंडिचर में भारी गिरावट का सीधा मतलब यह है कि सड़कें, पुल, अस्पताल, स्कूल और अन्य बुनियादी विकास परियोजनाएं ठप पड़ी हैं, विकास कार्यों की गति रुक चुकी है, रोजगार के अवसर तेजी से घट रहे हैं, उद्योगपति और निवेशक पंजाब में कदम रखने से कतराने लगे हैं और गांव से शहर तक बुनियादी ढांचा चरमराने लगा है।

श्री चुघ ने कहा कि पंजाब के वित्तीय हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सरकार विकास पर खर्च करने की स्थिति में ही नहीं है। ठोस आर्थिक प्रबंधन के अभाव में राज्य की आर्थिक हालत खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति पंजाब की वित्तीय विश्वसनीयता को डगमगा रही है, भविष्य में उधारी की लागत बढ़ेगी और सरकारी सेवाओं तथा सुविधाओं पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने इसे 'आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति' करार देते हुए कहा कि सरकार लोगों को गुमराह करने में लगी है, जबकि सच्चाई यह है कि जमीन पर विकास कहीं दिखाई नहीं देता।

श्री चुघ ने सवाल उठाया कि सरकार को बताना चाहिए कि पैसा आखिर कहां गया। पंजाब में कैपिटल एक्सपेंडिचर लगातार कम क्यों हो रहा है? विकास के लिए रखे गये हजारों करोड़ रुपये खर्च क्यों नहीं किये जा रहे? क्या सरकार के पास क्षमता नहीं है, या पैसा कहीं और जा रहा है? उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनकी मेहनत की कमाई का पैसा विकास में लगने की बजाय किस पर खर्च किया जा रहा है।

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