चंडीगढ़ , दिसंबर 06 -- पंजाब में पंचायत समिति चुनावों में नामांकन प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर हुई छीना झपटी की घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए है। कई जिलों से नामांकन पत्र छीनने और फाड़ने की अनेक घटनाएं सामने आईं।
इन घटनाओं से मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पुलिस और प्रशासन की आलोचना हो रही है।
पटियाला इन गड़बड़ियों का मुख्य केंद्र बनकर उभरा, जहां डराने-धमकाने और दस्तावेज़ नष्ट करने की अलग-अलग घटनाओं में छह प्राथमिकी दर्ज की गईं। वीडियो और फोटो उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस अब तक केवल दो आरोपियों की पहचान कर पाई है, जिससे विपक्षी दल जांच की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं। घनौर के सबसे ज़्यादा चर्चित मामलों में से एक में एक महिला के नामांकन पत्र उस समय ज़बरदस्ती छीन लिए गए जब वह नामांकन केन्द्र की ओर जा रही थी। फुटेज वायरल हो गया, फिर भी संदिग्ध का पता नहीं चल पाया है।
जुलकान, नाभा, त्रिपुरी और समाना से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आईं, जहां कथित तौर पर नकाबपोश लोगों या अज्ञात युवकों ने उम्मीदवारों को निशाना बनाया, उनके दस्तावेज़ छीन लिए या फाड़ दिए और फिर भाग गए। कई जगहों पर गवाहों ने कहा किया कि उम्मीदवारों को सरकारी परिसरों के बाहर रोका गया, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर और भी संदेह पैदा हुआ।
शिरोमणि अकाली दल ने राज्य के पुलिस प्रमुख से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वरुण शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने एसएसपी पर विपक्षी उम्मीदवारों को रोकने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए पुलिस अधिकार का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों पर प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को प्रवेश करने से रोकने और उनके कागजात खारिज करने का दबाव डाला गया और चेतावनी दी कि एसएसपी का बचाव करने वाले किसी भी व्यक्ति को कथित कदाचार का हिस्सा माना जाएगा।
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