चंडीगढ़ , जनवरी 24 -- नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, उपदेशों और उनके सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सेक्टर-8 सी स्थित गुरुद्वारा पातशाही दसवीं, चंडीगढ़ की ओर से पवित्र ग्रंथ 'सलोक महला 9' का औपचारिक विमोचन किया गया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल महामहिम गुलाब चंद कटारिया ने ग्रंथ का विमोचन किया।
सलोक महला 9' में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी द्वारा रचित सभी सलोक शामिल हैं, जो श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंग 1426 से 1429 से लिये गये हैं। इन सलोकों को गुरमुखी और हिंदी लिपि में प्रस्तुत किया गया है, जबकि पंजाबी, हिंदी और अंग्रेज़ी भाषाओं में उनके भावार्थ भी दिये गये हैं, ताकि गुरु वाणी का संदेश व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंच सके। इस पवित्र ग्रंथ का निःशुल्क वितरण किया जायेगा।
इस सुंदर कृति का प्रकाशन दविंदर पाल सिंह बंगा और हरविंदर पाल सिंह बंगा ने अपने पिता दिवंगत सरदार चंदन सिंह, गुरुद्वारा पातशाही दसवीं के संस्थापक अध्यक्ष, की स्मृति में कराया। कूलकिंग इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड, मालेरकोटला के प्रबंध निदेशक सजीव गोपाल सूद ने भी इस पहल में सहयोग दिया।
कार्यक्रम में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू सहित कई प्रतिष्ठित न्यायाधीश, विद्वान, लेखक और शिक्षाविद उपस्थित रहे। गुरुद्वारा पातशाही दसवीं के अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह बहल ने कहा कि 'सलोक महला 9' मानव जीवन को सत्य, वैराग्य और आत्मबोध का मार्ग दिखाने वाली अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर है।
पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि सिख धर्म ने बहुत बड़े बलिदान दिये हैं। उन्होंने कहा, "मैं राजस्थान का रहने वाला हूं और मेरा जन्म भी वहीं हुआ है। वहां हमें सिख धर्म के बारे में इतना विस्तार से नहीं बताया जाता था। पंजाब के स्कूलों में सिख इतिहास और सिख धर्म के बारे में अधिक जानकारी दी जाती है।"उन्होंने कहा कि यदि सिख धर्म की बात की जाये, तो इस धर्म ने मानवता की रक्षा के लिए अनेक महान बलिदान दिये हैं। राज्यपाल ने कश्मीरी पंडितों का भी हवाला देते हुए कहा कि जब उन पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जा रहा था, उस समय सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी ने उन्हें अपनी शरण दी। उन्होंने धर्म की रक्षा और मानवता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, जो सिख इतिहास का एक गौरवपूर्ण अध्याय है।
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