चंडीगढ़ , जनवरी 01 -- अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करके कृषि उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, पंजाब सरकार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) की मदद से कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अपनाने की तैयारी कर रही है।

पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह ने गुरुवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकियों से किसानों को जमीनी स्तर पर ठोस और मापने योग्य लाभ मिलने चाहिए। उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन और सफल एआई हस्तक्षेपों को सभी जिलोंमें विस्तारित करने के लिए पंजाब सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्वचालित मौसम स्टेशनों की स्थापना, किसानों को क्षेत्र डेटा संग्रह में शामिल करने, बागवानी समूहों को समर्थन देने और एआई-आधारित पशुधन उत्पादकता समाधानों के विस्तार को सुगम बनाने का निर्देश भी दिया।

कृषि मंत्री ने आईआईटी रोपड़ द्वारा परिशुद्ध कृषि और कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य युवाओं के कौशल विकास और सरकारी अधिकारियों की क्षमता निर्माण करना है।

इस सहयोग से पंजाब एआई-आधारित कृषि परिवर्तन के क्षेत्र में अग्रणी और आदर्श राज्य के रूप में स्थापित होगा। पंजाब सरकार के समन्वित प्रयासों से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में संसाधन दक्षता, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और सतत विकास में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

बैठक के दौरान, आईआईटी, रोपड़ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुष्पेंद्र पी सिंह ने सह-प्रबंधन के तहत प्रमुख पहलों ( भारत सरकार द्वारा समर्थित लगभग 310 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ) के बारे में जानकारी दी, जिनमें एआई-आधारित फसल सलाहकार प्रणाली, बहुभाषी किसान चैटबॉट, फसलों के डिजिटल ट्विन, उपज अनुमान मॉडल, मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण, मौसम संबंधी जानकारी उपकरण और स्मार्ट पशुधन प्रबंधन अनुप्रयोग शामिल हैं।

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