चंडीगढ़ , अप्रैल 06 -- पंजाब सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग की विभिन्न परियोजनाओं को लागू करने हेतु 1,388 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्य योजना को अंतिम रूप दिया है।

राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने सोमवार को कहा कि राज्य के कृषि परिदृश्य को बदलने के एक बड़े प्रयास के तहत यह कार्य योजना अनुमोदन के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेज दी गई है। इसमें फसल अवशेष प्रबंधन (पराली प्रबंधन), जल संरक्षण, विविविधीकरण और प्राकृतिक खेती पर विशेष बल दिया गया है।

कृषि मंत्री ने बताया कि पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए सबसे बड़ा हिस्सा 600 करोड़ रुपये इस योजना के तहत आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य किसानों को सब्सिडी दरों पर इन-सिटू (खेत में) और एक्स-सिटू (खेत से बाहर) मशीनरी उपलब्ध कराना है ताकि पराली जलाने का स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके।" गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए 33.33 करोड़ रुपये 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (प्रति बूंद अधिक फसल) घटक के लिए रखे गए हैं। इसके तहत ड्रिप, स्प्रिंकलर और रेन गन जैसे कुशल सिंचाई उपकरणों को बढ़ावा दिया जाएगा।

कृषि मशीनीकरण के लिए 95 करोड़ रुपये और बीज सुधार व कपास प्रदर्शन परियोजनाओं के लिए 51.85 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। किसानों को अधिक पानी की खपत वाली धान की खेती से हटाकर मक्का, दालों और तिलहन की ओर मोड़ने के लिए 50.30 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। रसायन मुक्त खेती के राष्ट्रीय अभियान के अनुरूप प्राकृतिक खेती के लिए 8.25 करोड़ रुपये और दालों में आत्मनिर्भरता के लिए 4.17 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। मृदा स्वास्थ्य और उर्वरता प्रबंधन के लिए 20 करोड़ रुपये और कृषि विस्तार गतिविधियों के लिए 60.59 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ये एकीकृत प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाएंगे बल्कि पंजाब के पारिस्थितिक भविष्य को भी सुरक्षित करेंगे। कृषि मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को आगामी खरीफ सीजन के लिए पूरी तैयारी करने और योजनाओं को समय पर लागू करने के निर्देश दिए हैं।

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