कोटा , जनवरी 12 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी सोच के तहत प्रारंभ किया गया "पंच गौरव कार्यक्रम" राजस्थान के समग्र विकास की दिशा में एक अभिनव और प्रभावशाली पहल है।

यह कार्यक्रम प्रदेश के प्रत्येक जिले की भौगोलिक, कृषि, सांस्कृतिक और आर्थिक विशेषताओं को पहचान देकर उन्हें विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प है। पंच गौरव केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि यह स्थानीय संसाधनों को वैश्विक पहचान दिलाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है।

आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि पंच गौरव का मूल उद्देश्य हर जिले की पहचान, हर नागरिक का सशक्तीकरण राज्य के युवाओं, महिलाओं, किसानों और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित करना है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्ट उपज, खेल, पर्यटन स्थल और जैव विविधता को संरक्षित एवं संवर्धित करके आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि "स्वदेशी, स्थानीय और आत्मनिर्भर भारत" की भावना को भी ठोस आधार प्राप्त हो रहा है।

सू्त्रों ने बताया कि कोटा जिले को उसकी विशिष्टताओं के आधार पर पंच गौरव के अंतर्गत विशेष पहचान दी गई है। इसके तहतएक जिला एक उत्पाद कोटा डोरिया, एक जिला एक उपज धनिया, एक जिला एक वनस्पति प्रजाति: खैर, एक जिला एक खेल कुश्ती और एक जिला एक पर्यटन स्थल चंबल रिवर फ्रंट है। इन पंच गौरवों के माध्यम से कोटा को कृषि, पर्यटन, खेल और जैव विविधता के क्षेत्र में एक सशक्त विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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