लखनऊ , फरवरी 12 -- उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच को अवगत कराया है कि आगामी पंचायत चुनाव से पूर्व प्रदेश में एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (डेडिकेटेड ओबीसी कमीशन) का गठन किया जाएगा।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ कर रही थी। मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव में सीटों का आरक्षण नए समर्पित आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही तय किया जाएगा। यह कदम उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में उठाया जा रहा है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनाव से पहले समर्पित आयोग का गठन अनिवार्य बताया गया है।
गौरतलब है कि प्रदेश में वर्तमान ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो चुका था। सरकार ने उसका कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया, लेकिन उसके पास समर्पित आयोग जैसी संवैधानिक शक्तियां नहीं होने को लेकर सवाल खड़े हुए थे।
अब प्रस्तावित समर्पित आयोग पिछड़े वर्ग का 'रैपिड सर्वे' करेगा। इस सर्वे के माध्यम से प्रदेश में पिछड़ों की वास्तविक आबादी का आकलन किया जाएगा और उसी आधार पर सीटों का आरक्षण निर्धारित होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थानीय निकाय या पंचायत चुनाव से पहले तीन वर्ष के कार्यकाल वाला समर्पित आयोग या कमीशन होना आवश्यक है। सरकार के इस निर्णय से संकेत मिलते हैं कि पंचायत चुनाव की तिथियों की घोषणा समर्पित आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही संभव होगी। माना जा रहा है कि इस कदम से आरक्षण को लेकर संभावित कानूनी विवादों में कमी आएगी और चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
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